बुधवार, 9 मई 2018

बूढ़े और बच्चे

दरअसल हर पुरानी पीढ़ी को अपनी नई पीढ़ी में नुक़्स दिखाई देता है और हर नई पीढ़ी अपनी पुरानी पीढ़ी को कमतर आंकती है , खैर यह कोई नई बात नहीं है पर हमें शुरू से सिखाया जाता है की आप केवल अपनी बात कहें दूसरे की बात सुनना तो हमें सिखाया ही नहीं जाता । आज जो परेशानी है की बच्चे अपने बूढ़ों से परेशान हैं बूढ़े अपने बच्चों से क्योंकि बूढ़ों को लगता है कि हमारे जो बच्चे हैं वह हमें तवज्जो नहीं दे रहे और बच्चों को लगता है कि हमारे जो बूढ़े हैं वह हमारी आजादी में दखल दे रहे हैं दरअसल यहां पर कोई किसी की गलती नहीं है बल्कि बस समझदारी की कमी है बच्चों को समझना चाहिए कि बूढ़े भी अब तवज्जो के हकदार हैं और बूढ़ो को भी समझना चाहिए कि बच्चों की आजादी उनके लिए सबसे अच्छा तोहफा है।
तो खुद को इरिटेट होने से या फिर दूसरों को दुखी करने के बजाए आप थोड़ी सी समझदारी से काम लें बच्चे अपने बूढ़ों को थोड़ी तवज्जो दें और बूढ़े अपने बच्चों को आजाद रहना सिखाए।