बुधवार, 11 जुलाई 2018

खत

खत 
तुम बेबकूफ हो क्या ? लड़की बोली 
क्यों ?
आज इन्टरनेट के जमाने में प्रेम भरे खत  लिखने की कोन कहता है ....
मैं ....
लेकिन क्यों ?
यार मज़ा तो खत में ही है शब्दों से भावनाये खालिस रूप में जाहिर हो जाती है और वैसे भी मेरा बचपन का सपना है की मुझे कोई खत लिखे .........
लडके तुम पागल हो .
तुम्हे केसे पता .
बस पता चल गया..
पता चल गया , कोई बात नहीं बस एक कम करना इस बात को किसी और को मत बताना .. लड़के के चेहरे पर शैतानी थी 
तुम सच में पागल हो ..अब फिजा मे प्यार  वाली हँसी घुल रही थी 

                                                                                        पीयूष शास्त्री 

सोमवार, 2 जुलाई 2018

कायनात


कोटा आने से पहले निश्चित किया था की रविवार को किसी एक को पत्र लिखूंगा , हाँ क्योकि मेरे  समय का सदुपयोग हो सके और किसी एक विचार को मूर्त रूप दे सकूँ , बस ये वही प्रयास है | रविवार का पत्र ; ये श्रंखला इसलिए भी प्रारंभ की है ताकि नए लोगों से और पुराने लोगों से बातचीत हो सके उनके विचार मैं जान सकूँ और अपने विचार उनसे साझा कर सकूँ , ये केवल प्रयास भर है मेरी बात आप तक पहुँचाने का और इस प्रयास की पहली कड़ी में पहला पत्र लिखा गया बाराबंकी की प्यारी सी लड़की कायनात को 
पत्र आपके सामने प्रस्तुत है 


रंग बिरंगे दिल 
वाली लड़की
मैं यहाँ पर बिलकुल ठीक हूँ और स्वस्थ हूँ और आशा है तुम भी बाराबंकी में कुशलता पूर्वक होगी , हां जिन्दा भी

कोटा आने से पहले सोचकर आया था की रविवार को किसी एक को पत्र लिखूंगा , याने चिट्ठी अगर एंड्रोइड होता तो हाथ से लिखकर फोटो भेज देता खेर ;
कुछ चीज़े जो मुझे तुम्हे बतानी थी 
कल जो तुमने कहा था की तुम्हे कोई कमाल नहीं करना ये अच्छा संकेत है , तूफान आने से पहले लोग ऐसा ही सोचते हैं की ये शान्ति का समय है दरअसल वही सबसे रोमांचक समय होता है जब तूफान खुद की तैयारी मैं जुटा होता है |
कमाल की बात मेरे साथ होती है की आमतौर पर मैं लोगो से मिलता हूँ प्रभावित होता और कई बार आदर्श भी बना लेता हूँ पर अंततः होता ये है की वो उतना महान नहीं होता जितना हम मानते हैं दरअसल ये होता इसलिए है की हम अक्सर लोगो को एक पक्ष से देखके उसको बड़ा मान लेते है या उसके पूरे चरित्र या व्यक्तित्व को एक विशेषता के कारण कमाल का मान लेते हैं पर ऐसा होता नहीं है | ये सब बात बताने का फायदा क्या है ये सुनो , की जब हम किसी से मिले तो बिना किसी पूर्वाग्रह के और जब आदर्श बनाये तो अच्छी तरह जाँच और परीक्षा करके इससे होगा क्या की हम बाद में निराश होने से बच जायेगे , इसे आज के बाबाओ वाले पोपडम के माहोल और दूषित हवाओ के सन्दर्भ में भी पढ़ सकती हो  |
जीवन में कुछ चीज़े मैं करना चाहता हूँ इसलिए नहीं की वो बेहतरीन है या लोगो ने उन्हें अच्छा बताया बल्कि इसलिए क्योकि मैं उन्हें करना चाहता हूँ उसमे एक अच्छा शिक्षक , अच्छा पति ,  अच्छा दोस्त , अच्छा पुत्र  और थोडा बहुत लेखक बनना शामिल है | 
ये  जगजाहिर पीयूष शास्त्री की  इच्छाओ की लिस्ट है पर एक लिस्ट पीयूष बाबा की इच्छाओ की भी है पर वो बेहद जूनून और पागलपन से भरी है ये लिस्ट किसी रोज बताऊंगा तुम्हे ,,,,,
ये सब चीज़े तुम्हे बताने का फायदा ये है की मेरा खुद से किया चिट्ठी वाला वायदा पूरा हुआ और दिल का सुकून अलग से बाकि बातें फिर कभी ....................
                                                                                       
                                                                                          पीयूष शास्त्री 


बुधवार, 9 मई 2018

बूढ़े और बच्चे

दरअसल हर पुरानी पीढ़ी को अपनी नई पीढ़ी में नुक़्स दिखाई देता है और हर नई पीढ़ी अपनी पुरानी पीढ़ी को कमतर आंकती है , खैर यह कोई नई बात नहीं है पर हमें शुरू से सिखाया जाता है की आप केवल अपनी बात कहें दूसरे की बात सुनना तो हमें सिखाया ही नहीं जाता । आज जो परेशानी है की बच्चे अपने बूढ़ों से परेशान हैं बूढ़े अपने बच्चों से क्योंकि बूढ़ों को लगता है कि हमारे जो बच्चे हैं वह हमें तवज्जो नहीं दे रहे और बच्चों को लगता है कि हमारे जो बूढ़े हैं वह हमारी आजादी में दखल दे रहे हैं दरअसल यहां पर कोई किसी की गलती नहीं है बल्कि बस समझदारी की कमी है बच्चों को समझना चाहिए कि बूढ़े भी अब तवज्जो के हकदार हैं और बूढ़ो को भी समझना चाहिए कि बच्चों की आजादी उनके लिए सबसे अच्छा तोहफा है।
तो खुद को इरिटेट होने से या फिर दूसरों को दुखी करने के बजाए आप थोड़ी सी समझदारी से काम लें बच्चे अपने बूढ़ों को थोड़ी तवज्जो दें और बूढ़े अपने बच्चों को आजाद रहना सिखाए।

रविवार, 7 जनवरी 2018

दीदा



कुछ लोग जिन्दगी में आते है और चले जाते है पर कुछ आपके पहले आते है और आपका इन्तजार करते है और आपके आने के बाद आपका मजाक उड़ाते है और फिर आपके पीछे आपकी तकलीफ उनकी होती है बस ऐसी ही है मेरी बड़ी दीदी नाम है आयुषी बुलाता दीदा हूँ और ये मम्मी को बिलकुल पसंद नहीं है |
अपनों के बारे में कुछ कहना यकीं मानिये ये दुनिया के कठिनतम कामों में से एक है इसलिए नहीं की उनके बारे में क्या बताये बल्कि इसलिए की उनके बारे में क्या क्या न बताये ढेर सारी बातों में से कुछ छांटना आसान नहीं है फिर भी कोशिश ही न हो ये गलत होगा |
एक नन्ही सी लड़की जो मेरी बड़ी बहन है को मैंने शायद पहली बार तब देखा जब मेरा जन्म हुआ और मैं कपडे में लिपटा प्रसव कक्ष से बाहर लाया गया तब एक लड़की मुझे बडी उत्सुकता और ख़ुशी से देखने की कोशिश कर रही थी दादी से उसने कहा भैया को मुझे दो दादी ने अपनी पोती की बात तुरंत मानी और मुझे उस डेढ़ साल की लड़की को थमा दिया लड़की का ख़ुशी से मुह खुला था मैंने खेलने की चीज़ समझ उसके मुह में हाथ डाल दिया लड़की अचानक से घबरा गयी मै सरकने लगा और लगभग गिर ही पड़ा था लेकिन नहीं लड़की खुद संभली और मुझे भी सम्हाल लिया , और आज तक एसा ही होता आ रहा है|
खेर पापा की मार से न जाने कितनी बार दीदी के कारण बचा याद नहीं | हम लोगो की कभी अच्छे से बनी हो एसा भी नहीं है आज भी हम जबकि हम दोनों ही जॉब करते है पर बच्चो की तरह एक दुसरे को चिडाते है मजाक उड़ाते है लड़ते है और पापा से डाट भी खाते है , पर इन सबके बीच मेरी सारी जरुरत का सामान का ख्याल दीदा को रहता है मेरी हर चीज़ कहा रखी है मैंने कोन सी चीज़ कहा रखी ये सब दीदा को पता है |
घर में दो चाश्मिस हो तो अपना चश्मा ढूंढने में आसानी होती है दीदा का चश्मा कूलर पे होता है ये  बिलकुल स्थापित सत्य है मेरा चश्मा पता नहीं कहाँ कहाँ भटक रहा होता है तो दीदा का चश्मा उठाया और अपना चश्मा ढूढ़ों |
दीदा आमतोर पर बेहद शांत होती है यकीं मानिये ऐसे लोग आमतोर पर बहुत कम मिलते है पर कभी कभी उनके जबाव सबको चुप्पा कर देते  है एक बार छोटे (शनि)ने मुझसे कहाँ की यार मै तो क्या तुझे कोई नहीं समझ सकता तो दीदा ने तुरंत जबाव दिया इसे समझने के लिए अक्ल चाहिए |
कभी चाहा तो पास में जाके रो लिया, कभी थोडा मक्खन लगा के सिर दबबा लिया और कभी जाके गाल खीच लिए , कभी हस लिया तो कभी नाच लिया साथ में |
खेर पापा से मम्मी तक कोई बात पहुचाना हो दीदा है न, वो है तो यार हो जायेगा चिल्ल , वो है तो लगता है की हां कुछ भी करना आसान है वो है तो आपको कुछ चिंता करने की जरुरत नहीं ,........
मेरी सबसे बड़ी प्रेरणास्रोत जो हर रश्ते पे मेरे साथ है
बो हमेशा कहती है अपनी कीमत खुद करो लोग तुम्हारी कीमत तभी करेंगे
एसी लड़की जो हमेशा क्लास में टॉप हो हर जगह अव्वल और सिमटी हुई अपने आप में. पर आप पर जान छिड़कती हो |
आज उनका जन्मदिन है और ये लेख उनके लिए एक छोटा तोहफा
दीदा आप बेस्ट हो सबसे आपसे आंगे भी लडूंगा आपके चोटी भी खीचुंगा आपके गाल कित्ते प्यारे है और हां सवेरे ठण्ड में अपने ठन्डे हाथो को लगाकर आपको जगाऊगा भी इसके बाबजूद आपसे प्यार करता हूँ करता रहूँगा ... लव यू ढेर सारा प्यार दीदा
पीयूष
हां आपका कालू 

 बीच  में है दीदी लम्बी चोटी

मंगलवार, 2 जनवरी 2018

एक रेजोल्यूशन ऐसा भी

कल सवेरे से मेरे मन में था नए वर्ष पे कुछ कहना है ये बाते खुद से और आपसे नए वर्ष के पहले दिन बीमार हो गया तो कुछ कह न पाया और आज सवेरे से व्यस्तता ने कुछ कहने न दिया..
खैर नया वर्ष आ चुका हैं मनाने वालो ने कुछ न कुछ रेजोल्यूशन लिए होंगे ,कुछ नए वर्ष का विरोध करने में मशगूल होंगे , तो कुछ बस इन सबके बीच में फसे होंगे ।
सो पहली बात
रेजोल्यूशन के नाम पे अक्सर हम कुछ आदतों कुछ बातों और कुछ अच्छे कामो की लिस्ट बना लेते है और उन्हें भरके किसी कचरे के डिब्बे में डाल देते है मतलब उन्हें पूरा नहीं करते , क्योकि ये महज़ भावुकता में लिए फैसले होते है ।(हो सकता है कोई दृढ़ता से इनका पालन भी करता हो उसके लिए साधुवाद)
लेकिन इस बार कुछ नया ट्राय करते है हम अपना गोल डिसाइड करते है कुछ सपने बनाते है तुच्छ बातों चीज़ों से उठके सोचते है चाहे तो इसके लिए वक्त ले पर इसे करना बेहद जरूरी है ।
गोल बनाये और उसपर चले बस इतनी सी बात
बात यकीनन सरल नई है पर सरलता से जीने के लिए इसे करना बहुत जरूरी है ।
बाकी जो रेजोल्यूशन लिए उनके लिए तालियां
लेकिन गोल इनमें सबसे ऊपर
अब दूसरी बात
इस साल हम मौन तोड़े
ये बात सच है मौन विश्व की श्रेष्ठतम बातों में से एक है पर अपराधियों की संख्या में इज़ाफ़ा करने में इसका बड़ा हाथ है मौन तभी सार्थक है जब इसका उपयोग भलाई के लिए हो , शक्ति होने पर भी हम झमेले में क्यों पड़े इसके लिए मौन है तो ये अपराध करने जितना बेकार है ।
खेर दूसरा बिन्दु समझ ही गए होंगे की बुरे काम होते देखे तो चुप नहीं बैठे , आपकी एक आवाज़ बहुत कुछ कर सकती है अपराधियों का मनोबल तोड़ सकती है और बाकियों का मनोबल बड़ा सकती है ।
बाकी नया वर्ष मुबारक हैईहै
पीयूष शास्त्री
गौरझामर

रविवार, 31 दिसंबर 2017

नव वर्ष

नूतन वर्ष तुम्हारा स्वागत
और तुम्हारा अभिनंदन
आओ आओ भले पधारो
आज हमारे भी आँगन

लेकर कुछ अच्छो के गुच्छे
और बहुत सी बचीं हैं बातें
तुम्हे सुनाने कुछ तारीफे
और साथ में कुछ तकलीफें
साथ जो आई पार समय के
उन सबको एक थाल में भरके
लेकर आये है इस आँगन में
कुछ बातें जो बीत चुकी है
और अभी कुछ होने को है
कुछ बातें जो अभी हो रही
उन सबको इक बार सुनाने।नूतन वर्ष ...

पिछले जो संकल्प लिए थे
कितना उनने हमको थामा
कितनी पूरी हुई प्रतिज्ञा
पथ से कितने हुए है बामा(बाई ओर/भटकना)
खेर सभी में कितना सच है
और खोखलेपन का लेपन
कितनी किसकी सीमाएं है
पीड़ाओं का कितना वेदन।। नूतन वर्ष

हमको तुम्हें बुलाना ही था
खुद से हम भी कितना छुपते
कुछ किस्से जो तुम्हे सुनाने
घाव पुराने कब तक सहते
खेर सभी जो किस्से मेरे
थोड़े धैर्य रखे सुन लेना
नूतन वर्ष जो आये तुम जो
उम्मीदों की वारिश देना
देना थोड़े मुट्ठी भर के
कुछ सपने आंखों में भरके
कुछ चीज़ें संघर्षों की भी
देना हमको खुश हो करके।। नूतन वर्ष
10.44 (31.12. 2017)
पीयूष शास्त्री
गौरझामर

गुरुवार, 21 दिसंबर 2017

शुभम मड़ावरा

भारतीय संस्कृति में कुछ चीज़े कभी कही नहीं जाती पर उनका महत्व बहुत होता है( मैं धार्मिक सिद्धांतो या कोई दार्शनिक बात नहीं कर रहा ) जैसे बिना कहे प्यार बिना कहे देखभाल और यक़ीनन ये बाते सबसे महत्वपूर्ण होती है दरअसल भारतीयो की सबसे खास आदत यही है की  अबे प्यार है तो है कहने की क्या जरुरत | बिना कहे समझ जाओ तो ज्यादा ठीक है (बाकि कुछ चीज़े बोलते ही कबाड़ा हो जाती है )
खेर समय और परंपरा के हिसाब से एक और मंगलम का परिचय आपको देना है हाँ  तो ये बेहद खास है मेरे लिए सीरीज में आप सबका स्वागत है और आज के लेख में आप मंगलम कक्षा के एक हीरे की खदान से लेकर तरासे हीरे तक की कुछ झलकियाँ देखेंगे |लड़के का नाम है शुभम बिलोंग करते है मड़ावरा से 
शुभम मड़ावरा - एक दुबला पतला सा लड़का जब नन्दीश्वर(मेरा पहला होस्टल जो खनियाधाना शिवपुरी जिले में है ) में दाखिल हुआ तो देखके लगा नहीं की ये लड़का कभी मेरा दोस्त बनेगा पर वो बना | लड़के का नाम था शुभम जिसके आगे चलकर  कई संस्करण जैसे मडू या मड्स हो गए पर लड़का इन सबसे प्रभावित नहीं हुआ लड़का गणित में तेज़ था सो हम उसके पंखा बन गए खेर ये हालात संस्कृत के मामले में भी रहे मडू संस्कृत में भी अव्वल रहा | मड़ावरा जैसे छोटे गाँव से आया लड़का जब नन्दीश्वर पंहुचा तो उसके सपनो को हवा मिली और जी उठे |
लड़के का हमेशा से मानना रहा है की रात जब सवसे गहरी होती है न बस उसके पार सुनहरी  सुबह आपके इंतज़ार कर रही होती है और अगर सवेरा न हुआ तो तो समझ जाइये रात अभी बाकि है|
एक बहन और एक भाई के नीचें सबसे छोटा भाई है पर जिम्मेदारी बड़े भाई सी निभाते देखा है  |
बात उस समय की है जब लड़के ने स्मारक (हमारा दूसरा होस्टल जो बापूनगर जयपुर में है) में प्रवेश ले चुका था और कनिष्ठ उपाध्याय(११वी ) के अर्धवार्षिक परीक्षाये शुरू हो चुकी थी पेपर संस्कृत का था और ११ बज चुके थे और खुदा गवाह है की हम बड़े जल्दी सोने वाले इंसानों में शुमार रहे है मड्स अपने सर्किट याने ज्ञायक के साथ सूत्र जोर जोर से रट रहा था हमने ज्ञायक से कहा भाई कट ले नींद आरेली है ज्ञायक से ये कहना था की मड्स बीच में बोल गया अबे तेरे बेड पे थोड़ी है फिर का हो गई लड़ाई इस लड़ाई के बाद बना मड्स का एक पक्का वाला दोस्त ज्ञायक (इनको पक्का दोस्त बनाने में हमारी साजिश थी )
लड़के का कहना है की यार बस में अगर सुन्दर सा चेहरा हो तो लम्बा सफ़र भी आसानी से कट जाता है
खेर लड़के के प्रेम प्रसंग भी चर्चित रहे है लेकिन जिन्दगी के पुरे मज़े लेने के बाबजूद लड़के ने संतुलन बनाये रखा बस इसी संतुलन में लड़के ने साबित किया की वो आखिर शुभम ही है |
लड़का फ़िलहाल शिक्षाशास्त्री के साथ साथ सिविल सर्विसेज़ की तैयारी कर रहा है |
लड़के से एक बात कहेगे हलाकि ये बात उसने ही मुझसे कही थी की यार तू अच्छा काम करेगा तो बुरे लोग  हसेंगे और यदि बुरे काम करोगे तो सब हसेंगे . काम ऐसा करो जिससे तुम नया सीखो जो तुम्हे आगे बढ़ने में मदद करे |
पीयूष शास्त्री
गौरझामर