रविवार, 7 जनवरी 2018

दीदा



कुछ लोग जिन्दगी में आते है और चले जाते है पर कुछ आपके पहले आते है और आपका इन्तजार करते है और आपके आने के बाद आपका मजाक उड़ाते है और फिर आपके पीछे आपकी तकलीफ उनकी होती है बस ऐसी ही है मेरी बड़ी दीदी नाम है आयुषी बुलाता दीदा हूँ और ये मम्मी को बिलकुल पसंद नहीं है |
अपनों के बारे में कुछ कहना यकीं मानिये ये दुनिया के कठिनतम कामों में से एक है इसलिए नहीं की उनके बारे में क्या बताये बल्कि इसलिए की उनके बारे में क्या क्या न बताये ढेर सारी बातों में से कुछ छांटना आसान नहीं है फिर भी कोशिश ही न हो ये गलत होगा |
एक नन्ही सी लड़की जो मेरी बड़ी बहन है को मैंने शायद पहली बार तब देखा जब मेरा जन्म हुआ और मैं कपडे में लिपटा प्रसव कक्ष से बाहर लाया गया तब एक लड़की मुझे बडी उत्सुकता और ख़ुशी से देखने की कोशिश कर रही थी दादी से उसने कहा भैया को मुझे दो दादी ने अपनी पोती की बात तुरंत मानी और मुझे उस डेढ़ साल की लड़की को थमा दिया लड़की का ख़ुशी से मुह खुला था मैंने खेलने की चीज़ समझ उसके मुह में हाथ डाल दिया लड़की अचानक से घबरा गयी मै सरकने लगा और लगभग गिर ही पड़ा था लेकिन नहीं लड़की खुद संभली और मुझे भी सम्हाल लिया , और आज तक एसा ही होता आ रहा है|
खेर पापा की मार से न जाने कितनी बार दीदी के कारण बचा याद नहीं | हम लोगो की कभी अच्छे से बनी हो एसा भी नहीं है आज भी हम जबकि हम दोनों ही जॉब करते है पर बच्चो की तरह एक दुसरे को चिडाते है मजाक उड़ाते है लड़ते है और पापा से डाट भी खाते है , पर इन सबके बीच मेरी सारी जरुरत का सामान का ख्याल दीदा को रहता है मेरी हर चीज़ कहा रखी है मैंने कोन सी चीज़ कहा रखी ये सब दीदा को पता है |
घर में दो चाश्मिस हो तो अपना चश्मा ढूंढने में आसानी होती है दीदा का चश्मा कूलर पे होता है ये  बिलकुल स्थापित सत्य है मेरा चश्मा पता नहीं कहाँ कहाँ भटक रहा होता है तो दीदा का चश्मा उठाया और अपना चश्मा ढूढ़ों |
दीदा आमतोर पर बेहद शांत होती है यकीं मानिये ऐसे लोग आमतोर पर बहुत कम मिलते है पर कभी कभी उनके जबाव सबको चुप्पा कर देते  है एक बार छोटे (शनि)ने मुझसे कहाँ की यार मै तो क्या तुझे कोई नहीं समझ सकता तो दीदा ने तुरंत जबाव दिया इसे समझने के लिए अक्ल चाहिए |
कभी चाहा तो पास में जाके रो लिया, कभी थोडा मक्खन लगा के सिर दबबा लिया और कभी जाके गाल खीच लिए , कभी हस लिया तो कभी नाच लिया साथ में |
खेर पापा से मम्मी तक कोई बात पहुचाना हो दीदा है न, वो है तो यार हो जायेगा चिल्ल , वो है तो लगता है की हां कुछ भी करना आसान है वो है तो आपको कुछ चिंता करने की जरुरत नहीं ,........
मेरी सबसे बड़ी प्रेरणास्रोत जो हर रश्ते पे मेरे साथ है
बो हमेशा कहती है अपनी कीमत खुद करो लोग तुम्हारी कीमत तभी करेंगे
एसी लड़की जो हमेशा क्लास में टॉप हो हर जगह अव्वल और सिमटी हुई अपने आप में. पर आप पर जान छिड़कती हो |
आज उनका जन्मदिन है और ये लेख उनके लिए एक छोटा तोहफा
दीदा आप बेस्ट हो सबसे आपसे आंगे भी लडूंगा आपके चोटी भी खीचुंगा आपके गाल कित्ते प्यारे है और हां सवेरे ठण्ड में अपने ठन्डे हाथो को लगाकर आपको जगाऊगा भी इसके बाबजूद आपसे प्यार करता हूँ करता रहूँगा ... लव यू ढेर सारा प्यार दीदा
पीयूष
हां आपका कालू 

 बीच  में है दीदी लम्बी चोटी

मंगलवार, 2 जनवरी 2018

एक रेजोल्यूशन ऐसा भी

कल सवेरे से मेरे मन में था नए वर्ष पे कुछ कहना है ये बाते खुद से और आपसे नए वर्ष के पहले दिन बीमार हो गया तो कुछ कह न पाया और आज सवेरे से व्यस्तता ने कुछ कहने न दिया..
खैर नया वर्ष आ चुका हैं मनाने वालो ने कुछ न कुछ रेजोल्यूशन लिए होंगे ,कुछ नए वर्ष का विरोध करने में मशगूल होंगे , तो कुछ बस इन सबके बीच में फसे होंगे ।
सो पहली बात
रेजोल्यूशन के नाम पे अक्सर हम कुछ आदतों कुछ बातों और कुछ अच्छे कामो की लिस्ट बना लेते है और उन्हें भरके किसी कचरे के डिब्बे में डाल देते है मतलब उन्हें पूरा नहीं करते , क्योकि ये महज़ भावुकता में लिए फैसले होते है ।(हो सकता है कोई दृढ़ता से इनका पालन भी करता हो उसके लिए साधुवाद)
लेकिन इस बार कुछ नया ट्राय करते है हम अपना गोल डिसाइड करते है कुछ सपने बनाते है तुच्छ बातों चीज़ों से उठके सोचते है चाहे तो इसके लिए वक्त ले पर इसे करना बेहद जरूरी है ।
गोल बनाये और उसपर चले बस इतनी सी बात
बात यकीनन सरल नई है पर सरलता से जीने के लिए इसे करना बहुत जरूरी है ।
बाकी जो रेजोल्यूशन लिए उनके लिए तालियां
लेकिन गोल इनमें सबसे ऊपर
अब दूसरी बात
इस साल हम मौन तोड़े
ये बात सच है मौन विश्व की श्रेष्ठतम बातों में से एक है पर अपराधियों की संख्या में इज़ाफ़ा करने में इसका बड़ा हाथ है मौन तभी सार्थक है जब इसका उपयोग भलाई के लिए हो , शक्ति होने पर भी हम झमेले में क्यों पड़े इसके लिए मौन है तो ये अपराध करने जितना बेकार है ।
खेर दूसरा बिन्दु समझ ही गए होंगे की बुरे काम होते देखे तो चुप नहीं बैठे , आपकी एक आवाज़ बहुत कुछ कर सकती है अपराधियों का मनोबल तोड़ सकती है और बाकियों का मनोबल बड़ा सकती है ।
बाकी नया वर्ष मुबारक हैईहै
पीयूष शास्त्री
गौरझामर