रविवार, 31 दिसंबर 2017

नव वर्ष

नूतन वर्ष तुम्हारा स्वागत
और तुम्हारा अभिनंदन
आओ आओ भले पधारो
आज हमारे भी आँगन

लेकर कुछ अच्छो के गुच्छे
और बहुत सी बचीं हैं बातें
तुम्हे सुनाने कुछ तारीफे
और साथ में कुछ तकलीफें
साथ जो आई पार समय के
उन सबको एक थाल में भरके
लेकर आये है इस आँगन में
कुछ बातें जो बीत चुकी है
और अभी कुछ होने को है
कुछ बातें जो अभी हो रही
उन सबको इक बार सुनाने।नूतन वर्ष ...

पिछले जो संकल्प लिए थे
कितना उनने हमको थामा
कितनी पूरी हुई प्रतिज्ञा
पथ से कितने हुए है बामा(बाई ओर/भटकना)
खेर सभी में कितना सच है
और खोखलेपन का लेपन
कितनी किसकी सीमाएं है
पीड़ाओं का कितना वेदन।। नूतन वर्ष

हमको तुम्हें बुलाना ही था
खुद से हम भी कितना छुपते
कुछ किस्से जो तुम्हे सुनाने
घाव पुराने कब तक सहते
खेर सभी जो किस्से मेरे
थोड़े धैर्य रखे सुन लेना
नूतन वर्ष जो आये तुम जो
उम्मीदों की वारिश देना
देना थोड़े मुट्ठी भर के
कुछ सपने आंखों में भरके
कुछ चीज़ें संघर्षों की भी
देना हमको खुश हो करके।। नूतन वर्ष
10.44 (31.12. 2017)
पीयूष शास्त्री
गौरझामर

गुरुवार, 21 दिसंबर 2017

शुभम मड़ावरा

भारतीय संस्कृति में कुछ चीज़े कभी कही नहीं जाती पर उनका महत्व बहुत होता है( मैं धार्मिक सिद्धांतो या कोई दार्शनिक बात नहीं कर रहा ) जैसे बिना कहे प्यार बिना कहे देखभाल और यक़ीनन ये बाते सबसे महत्वपूर्ण होती है दरअसल भारतीयो की सबसे खास आदत यही है की  अबे प्यार है तो है कहने की क्या जरुरत | बिना कहे समझ जाओ तो ज्यादा ठीक है (बाकि कुछ चीज़े बोलते ही कबाड़ा हो जाती है )
खेर समय और परंपरा के हिसाब से एक और मंगलम का परिचय आपको देना है हाँ  तो ये बेहद खास है मेरे लिए सीरीज में आप सबका स्वागत है और आज के लेख में आप मंगलम कक्षा के एक हीरे की खदान से लेकर तरासे हीरे तक की कुछ झलकियाँ देखेंगे |लड़के का नाम है शुभम बिलोंग करते है मड़ावरा से 
शुभम मड़ावरा - एक दुबला पतला सा लड़का जब नन्दीश्वर(मेरा पहला होस्टल जो खनियाधाना शिवपुरी जिले में है ) में दाखिल हुआ तो देखके लगा नहीं की ये लड़का कभी मेरा दोस्त बनेगा पर वो बना | लड़के का नाम था शुभम जिसके आगे चलकर  कई संस्करण जैसे मडू या मड्स हो गए पर लड़का इन सबसे प्रभावित नहीं हुआ लड़का गणित में तेज़ था सो हम उसके पंखा बन गए खेर ये हालात संस्कृत के मामले में भी रहे मडू संस्कृत में भी अव्वल रहा | मड़ावरा जैसे छोटे गाँव से आया लड़का जब नन्दीश्वर पंहुचा तो उसके सपनो को हवा मिली और जी उठे |
लड़के का हमेशा से मानना रहा है की रात जब सवसे गहरी होती है न बस उसके पार सुनहरी  सुबह आपके इंतज़ार कर रही होती है और अगर सवेरा न हुआ तो तो समझ जाइये रात अभी बाकि है|
एक बहन और एक भाई के नीचें सबसे छोटा भाई है पर जिम्मेदारी बड़े भाई सी निभाते देखा है  |
बात उस समय की है जब लड़के ने स्मारक (हमारा दूसरा होस्टल जो बापूनगर जयपुर में है) में प्रवेश ले चुका था और कनिष्ठ उपाध्याय(११वी ) के अर्धवार्षिक परीक्षाये शुरू हो चुकी थी पेपर संस्कृत का था और ११ बज चुके थे और खुदा गवाह है की हम बड़े जल्दी सोने वाले इंसानों में शुमार रहे है मड्स अपने सर्किट याने ज्ञायक के साथ सूत्र जोर जोर से रट रहा था हमने ज्ञायक से कहा भाई कट ले नींद आरेली है ज्ञायक से ये कहना था की मड्स बीच में बोल गया अबे तेरे बेड पे थोड़ी है फिर का हो गई लड़ाई इस लड़ाई के बाद बना मड्स का एक पक्का वाला दोस्त ज्ञायक (इनको पक्का दोस्त बनाने में हमारी साजिश थी )
लड़के का कहना है की यार बस में अगर सुन्दर सा चेहरा हो तो लम्बा सफ़र भी आसानी से कट जाता है
खेर लड़के के प्रेम प्रसंग भी चर्चित रहे है लेकिन जिन्दगी के पुरे मज़े लेने के बाबजूद लड़के ने संतुलन बनाये रखा बस इसी संतुलन में लड़के ने साबित किया की वो आखिर शुभम ही है |
लड़का फ़िलहाल शिक्षाशास्त्री के साथ साथ सिविल सर्विसेज़ की तैयारी कर रहा है |
लड़के से एक बात कहेगे हलाकि ये बात उसने ही मुझसे कही थी की यार तू अच्छा काम करेगा तो बुरे लोग  हसेंगे और यदि बुरे काम करोगे तो सब हसेंगे . काम ऐसा करो जिससे तुम नया सीखो जो तुम्हे आगे बढ़ने में मदद करे |
पीयूष शास्त्री
गौरझामर

मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

सिद्धार्थ

यह बेहद खास है मेरे लिए आज फिर मौका है आप सबके सामने जज्बातों को रखने का। मौका है एक कड़ी को दूसरी कड़ी से जोड़ने का कुछ चीजें जिंदगी में हमेशा बेहतरीन होती हैं और यकीन मानिए आप लोगों का होना सच में बेहतरीन है आप सभी मंगलम प्रतीकों की तरह हैं जो हमेशा हमेशा प्रेरणा का काम करते हैं आप है तो यकीन रहता है कि हां सब ठीक है कुछ चीजें जिंदगी में बेहतरी के लिए होती हैं और स्मारक जाना और स्मारक में 5 साल बिताना वहां पर नई यादें बनाना किसी खुशनुमा सपने की तरह है पर यह सपना नहीं है यह वाकई सच है और आप सब इस सच के साझेदार हैं तो आइए इस श्रंखला के नए लेख से मुलाकात करते हैं।
सिद्धार्थ मुगावली- हां तो बात उस जमाने की है जब दोस्तों में सॉरी और थैंक्यू नहीं होते थे बल्कि केवल गालियां होती थी उस जमाने में कंधे पर बैग डाले हाथों में बोरिया-बिस्तर लिए एक लड़का स्मारक में दाखिल हुआ ध्यान रखें लड़के को किरान्ति करनी थी फिर क्या हाथों की आस्तीन ऊपर चढ़ाई और जोर से बोले अबकी बार मोदी सरकार फिर क्या अंतर मोदी सरकार जीत गई खैर सिद्धार्थ मुगावली उन चुनिंदा प्राणियों में से हैं जो स्मारक में रहकर डबल डिग्री ले पाए डिग्री के चक्कर में भैया एक बार 10 दिन के लिए बिना बताए हॉस्टल से गायब थे मेरे रिकॉर्ड में यह पहली बार था जब कोई बंदा बिना बताए गायब होने के बावजूद स्मारक से नहीं निकाला गया खैर लड़का बुद्धिमान हैं और इनोसेंट भी वह कहता है कि दोस्ती का पहला और आखरी उसूल है कि जान देना पर इज्जत बिल्कुल नहीं देना.
भाई को किताबें पढ़ने का शौक है पर मोबाइल किंडल या टेबलेट पर नहीं क्योंकि इस लड़के का कहना है कि जिस चीज को सिर पर रख कर ना सो सकें उसे पढ़ने में कोई मजा नहीं है।
बचपन को लेकर भाई कुछ ज्यादा सीरियस हैं बचपन के बारे में लड़का कहता है कि ठोड़ी गाल घुटने कोहनी माथे पर कोई निशान नहीं है तो क्या तुमने घंटा बचपन जिया है
बाकी भाई मोदी भक्त रहे हैं और कट्टर वाले भक्त रहे पर मुझे आज तक समझ में नहीं आया कि खुद की मुल्लो जैसी दाढ़ी होने के बावजूद यह उन से इतनी घृणा क्यों करते हैं ।
बाकी सिद्धार्थ के संदर्भ में एक बात समझ लेने लायक है कि भाई अच्छा आदमी है और इतना अच्छा आदमी है की हर समस्या का समाधान कर देता है हालांकि बाद में लोग कहते हैं कि ऐसे तो समस्या ही अच्छी थी  ।
दरअसल सिद्धार्थ का असल जीनियस तो यह है कि वह कहता है कि इस छोटी सी जिंदगी में जिंदगी को ढूंढ लेना बड़ी बात है
अब सिद्धार्थ के बारे में असली बात करें तो लड़का दिल का बड़ा साफ है हमने भी गुजारे हैं साल भर के दिन इस लड़के के साथ खैर अच्छी यादें पुरानी शराब की तरह होती हैं जितनी अच्छी और पुरानी उतनी ज्यादा नशीली
खेर आज भी याद है वह सरसों का तेल जिस की बदबू पुरे रूम में रहती थी
वह मुल्तानी मिट्टी जो तू हर संडे अपने चेहरे पर लगाता था खैर वह दिन यादगार थे अब लड़के के बारे में कुछ बिंदु जो आपको समझ लेनी चाहिए लड़का मोदी भक्त हैं अगर आप नोटबंदी जीएसटी आधार कार्ड के बारे में मोदी जी को सिद्धार्थ के सामने कोसने वाले हैं तो ऐसा ना करें ऐसा  करना आपके लिए घातक हो सकता है फिलहाल लड़का इंदौर में है सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा है बाकी प्यार पहुंचे लड़के
पीयूष जैन Shastri

शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017

सरकारी स्कूल और मैं

सरकारी स्कूल में पढ़ाना केवल पढाना नई होता ये तो उन हालातो को पढ़ना होता है जिनमे  स्कूल के बच्चे बसर करते है । दरअसल आपको यहाँ प्राइवेट स्कूलों के बच्चो जैसे  पैक्ड मुस्कान और खिल चेहरे नही दिखते यहाँ आपको ट्रेजडी कॉमेडी दोनों के हालातों से गुजरना पडता है एक बच्चे को जहाँ संस्कृत और हिंदी के छन्द और गणित के सारे प्रमेय याद होते है वही दूसरे को ढंग से हिंदी  के अक्षर पढ़ना नही आता (8वी तक के बच्चो को पास करने का आदेश जो है) खेर क्लास में योग्यता के हिसाब से अगर ग्रुप बनाये जाए तो 6 -7 ग्रुप बनेगे ।
बच्चो पर हाथ नहीँ उठाता ( बच्चो पे हाथ उठाना अच्छा नई लगता) । मैं इन्हें श्लोक सिखाना चाहता हूँ सिखाना चाहता हूँ साहित्य का सौंदर्य की  इतिहास के किरदार कितने मज़ेदार है पर ये कमरे में लगे नए स्विच बोर्ड में को निहारने में व्यस्त है मैं उन्हें श्लोक बुलबाता हूँ वो अपनी पेंसिल और स्केल को अपने फटे बैग पर पटक पटक कर उस लय को संगीत देने में लगे है ।
मैं इन्हें मजबूत दृढ़ और वलिष्ट बच्चो की कहानियां सुनाना चाहता हूँ पर इनके बाल उलझे है हाथ पैर रूखे और फट रहे है पिछले साल की यूनिफॉर्म की सिलाई उखड़ रही है शर्ट के 2 3 बटन  गायब है ।
हाथ की हथेलियां थोड़ी सख्त हो गई है पैरो की एड़िया भी फट रही है सोयाबीन काटने की बजह  से उनमे छोटे छोटे घाव हो गए है। मैं उनके साथ सख्त होना चाहता हूँ पर असफल रहता हूँ उनके साथ वैसे भी जिंदगी तो इतनी सख्त है । बीच मे स्कूल आने के लिए कीचड़ भरी नदी है जिनमे वो नंगे पैरो से आते है उसको अपनी साइकिल से पार करके आना भी मुझे भीतर तक दुखी कर देता है। किसी के पापा नही है और कोई मातृरविहीन है पिता खाली हाथ है पैसे से भी ओर काम से भी। इनकी नियति क्रूर है
लेकिन इनकी आंखों में चमक है बस शरीर का एकमात्र हिस्सा जो उनके जिंदा रहने का अहसास कराता है ।
इनके आईएएस डॉक्टर इंजीनयर नेता बनने के ख्वाब इनमें दिखाई देते है।
बाकी हर रोज प्रार्थना करता हूँ कि  कभी ऐसी मुसीबत में न फसो की तुम्हारी यह निश्छलता खो न जाये, बस इतना ही कि तुम इतने ताकतवर बनो की हर मुश्किल  और तकलीफ तुम्हारे आगे घुटने टेक दे।
पीयूष शास्त्री
गौरझामर

मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

अनुभव भिंड

कुछ खुशनुमा चीज़े आपको असली खुशी देती है आप कभी भी उन्हें याद कीजिए आपके चेहरे पर हँसी की पतली फुहार हो जाती है बस ऐसी ही है मेरी क्लास मंगलमस के लिए की गई ये सीरीज *ये बेहद खास है मेरे लिए* जो मुझे एक अलग दुनिया में ले जाती है और हर लेख के साथ मेरी खुशी मैं तरक्की हो जाती है।
आज एक बंदे को खुलेआम लाना चाहते है अमा यार सोफा लगेगा इसे कुर्सी से काम न चलेगा ☺ हओ तो कहानी है एक दस्यु प्रदेश में रहने वाले अनुभव की
पूरा नाम अनुभव जैन भिंड(आजकल शास्त्री हो गए है)
हाँ तो जनाब ए आली पेश ए नुमाइश है *अनुभव जैन भिंड* (तालिया👏)......चल यार तू थाली में पुलाव भर मैं पनीर भरता हूँ  ध्यान से आइसक्रीम जरूर ले लिय्यो बे बाकी दूल्हे को लिफाफा बाद में दे देंगे ये था हमारा अनुभव । एक बार एक लड़के ने कहा था कि बेटे *जेब में पैसा ,पेट में खाना ,हाथ में आइफोन ,कमरे स्लिप्ट एसी और पिछवाडे के नीचे सोफा हो तो ओशो क्या आसाराम की भी बातें अच्छी लगने लगती है बे गुड्डू* इत्ति ज्ञान की बात अनुभव के अलावा कर कोन सकता था ।
खेर अनुभव के अनुसार जीवन को आसान बनाने के लिए छोटी छोटी चीज़ों को भी अच्छे से संयोजित करने की जरूरत होती है ।
लड़के का कहना है कि काम करने से पहले सिर्फ एक बात ध्यान रखे कि जो पेट नाम की चीज़ है इसे खाद्य सामग्रियों से भर ले । खाद्य से याद आया अनुभव से बेहतरीन चिप्सखोर इंसान आपको स्मारक में ढूंढने से न मिलेगा,
भाई को चिप्स बेइंतहा तरीके से पसंद है यहाँ तक कि लड़का सपने में लड़कियों को गुलाब के फूल के बजाय दही में डूबे चिप्स को दिखा के प्रपोज कर चुका है ।
लड़का का असल जीनियस तो ये है कि  वो कहता है कि *क्या बनोगे ? इससे बेहतर है ये जानना की कैसे जिओगे कुछ बनने से महत्वपूर्ण है जीना* ।
छोकरे ने स्कूली लाइफ को जरूर पढ़ाई में जिया हो पर कॉलेज वाली लाइफ को असल मे जिया है पर ये आज भी राज ही कि इतनी मस्ती के बाबजूद अनुभव के नंबर पेपर में कैसे अच्छे आते थे ।
खेर लड़का कहता है कि सबसे बुरा है कोई ख्वाब का न होना पर उससे बदतर है झूठे ख्वाब में संतुष्ट होना ।
अनुभव की अलग अलग क़्वालिटी है पर इन सबमें बेहतर बात ये है कि वो अनुभव है और यह बात अनुभव को अनुभव बनाती है  ।
लड़के ने एक बार कहा था कि  बाबा दूसरे में खुद का अक्स ढूंढना सबसे बड़ा पागलपन है और जो ऐसा करता है वो अक्सर भीड़ में खो जाया करता है तुम तुम हो इसी में तुम्हारी बड़ाई है अगर दूसरे में अपना अक्स खोजने गए तो अपना अक्स मिटा बैठोगे । ये बात तब बिल्कुल पल्ले न पड़ी तो खिसिया के उससे कहा हओ तेरे लिए चिप्स ले आया हूं बन्दा खुश और मैं रफूचक्कर ।
लास्ट टाइम जब दही चिप्स से बात हुई तो उसने कहा कि भाई सर्दियों में दिन छोटे और रात बड़ी होती है लेकिन जब सुबह रजाई छोड़कर उठने का टाइम होता है न तो अंग्रेजी में पढ़ा ये चैप्टर भी चूतिया नज़र आता है ।
बाकी बंदे का कहना है कि सुंदर होना भी एक बला है प्रोपजल देने पर भी शक के दायरे में रहती है ।
और अंत मे
वक्त के साथ हम भी बदल जाते तो अच्छा था
बहुत अरमान थे दिल में निकल जाते तो अच्छा था
जहाँ भी गए है मिले बस चाय के साथ बिस्कुट
समोसे और पोहे भी मिलते तो अच्छा था
अनुभव को समर्पित
पीयूष शास्त्री
गौरझामर

सोमवार, 11 दिसंबर 2017

अर्पित मिठ्या


इन बिगड़े दिमाको में घनी खुशबू के लच्छे है
हमें पागल ही रहने दो हम पागल ही अच्छे है
नमस्कार दोस्तो
आशा है सब जिंदा होंगे और जाहिर सी बात है जिंदा होने के सबूत दुनियाभर को दे रहे होंगे अपने कामो से और अपने जिंदा विचारों से ।
ये लेखमाला ये बेहद खास है मेरे लिए एक सौगात की तरह है जो मुझे तुम सब मंगलमस से अटूट बंधन बांधे हुए है मैं आज भी तुम सब लोगो को अपने करीब पाता हूं आगे भी जितनी जिस्मानी दूरियां आये पर ये नेह और दोस्ती की डोर मजबूत होती जाएगी और हम सब को सम्बल का काम करेगी।
हम सभी संघर्ष के दौर से गुजर रहे है पर मुझे ये दिली तौर पर विश्वास है कि आप सब बेहद मजबूत है ये संघर्ष हमे निखार कर रख देंगे चमचमाते हीरो की तरह।
वक्त की मांग के लिहाज से एक बंदे को आपके सामने लाना है तो साहिबान आज आपके सामने आ रहे है अर्पित जैन मिठिया ललितपुर जोरदार तालियाँ........
अर्पित ललितपुर -लड़का साइड अटेकर है मल्लब छुपा रुस्तम । नंदीश्वर मे कई साल पहले एक लड़का आया था पतला कमजोर तीखी नाक और तेज़तर्रार तेवरों वाला उसकी कंजी आंखे थोड़ी डरावनी सी बिल्कुल पागल सनकी वैज्ञानिको की तरह, बस यही था अर्पित ।
अपने up से अपने तेवरों और जुनून को लेके नंदीश्वर में आया लड़का पहली नज़र में कुछ खास नई लगा पर जब इसने खुद को साबित करना शुरू किया तो सबके होश फाख्ता हो गए। पर अब तो आदत सी हो चली है कि कोई अजीबोगरीब काम अर्पित ने किया ऐसा सुनते ही पहला वाक्य मुँह से निकलता है कि अर्पित होगा तो कुछ भी कर सकता है।
खेर किरान्ति हर योग्य इंसान करना चाहता है और बहुत योग्य व्यक्ति उसे कर भी डालता है अर्पित भी जयपुर किरान्ति के उद्देश्य से आया था और किरान्ति का पहला ज्ञान दिया
की जिस लड़की को रविवार को दोस्त बनाओगे सोमवार को चैटिंग करोगे वही लड़की मंगलवार को तुम्हे भाई बना डालेगी और इस तरह 4 दिन की जिंदगी 3 दिन में खत्म हो जाएगी।
खेर ये भी असल मुद्दे की बात नई है । लड़के ने किरान्ति की जमके की पढ़ाई मे की ।दरअसल लड़के का कहना यही है कि दुनिया तुम्हे तबतक पागल समझती है जबतक तुम खुद को साबित नई कर देते। इसलिए हमें जब भी काम करने का मौका मिलेगा सिर झुकाके काम करेंगे और दुनिया की बता देगे की हमे भी मौका मिले तो हम भी अपने हुनर से सबको चमका सकते है ।

भतीजे ने एक बार कुंन्ने में ले जाके एक बात कही थी कि लड़की की न मे उसकी हाँ छुपी होती है मुझे पता नई किस महान झंडू ने ये जुमला उखाड़ा था कई लपडगंजू आज भी इसका अनुसरण करते है पर एक बात 101 टका सच्ची है कि हर मेहमान की चाय नास्ता खाना के टाइम की जबरदस्ती की न के पीछे जबरदस्त हाँ छुपी होती है । इसलिए खाना पहले उसके बाद भजन करो।

एक जबरदस्त बात ये है कि अर्पित आजकल इत्ता ज्यादा सिंगल है
की कभी कभी खुद की कॉलर पकड़ के कहता है कि

.
.
.babu you dont love me
लड़का बडा हो गया है पढ़ाई के साथ जॉब भी कर रहा है यार सैलेरी की मत पूछियो
बस इत्ती समझ लो तुम मर जाओँ तो क्रियाकरम बेहतरीन ढंग से हो सकता है।
लास्ट में इत्ता ही
यार हमारी कोशिश करने से क्या होगा कोई नई सुनेगा कोई नई समझेगा कोई नई बदलेगा
मुट्टी भर लोग क्या कर लेंगे
कुछ मत कीजिए बस अपने पूर्वाग्रह को एक तरफ उठा के रख दीजिए ऒर  बायस्ड हुए बिना तथ्य खोजिये थोड़ा कॉमन सेंस लगाइए सेल्फ एनालिसिस कीजिए । ज्यादा मुश्किल नही है थोड़े दिनों में आदत हो जाएगी किसी को अति महिमण्डित मत कीजिये और न ही किसी को सिरे से खारिज करिये बस अपनी आंखें दिमाक ओर दिलो मे गुंजाइश खुली रखिये आप संघर्षों की भट्टी में तपकर मजबूत होकर सफल हो चुके होंगे।
       पीयूष शास्त्री
   गौरझामर

रविवार, 10 दिसंबर 2017

स्वप्निल

कुछ दोस्त ऐसे होते है जो भुलाए नही भूलते । चाहे कितनी भी दूर चले जाए दिल का खास कोना उनके लिए रिजर्ब रहता है उनके चले जाने पर उनकी यादे उस कोने पर कब्जा कर लेती है और ये  यादे इतनी प्यारी घुसपैठिया होती है जो निकाले नही निकलती कही न कही वक्त की रेत पे निशानों की तरह ढूंढ ही लेती है और इन्हें निकलना नामुमकिन हो जाता है। ऐसे ही
एक दोस्त ने मेरे से कहा था की सबका प्यार पाने का एक ही तरीका है हमेसा नासमझ बने रहो जो साला तुम जैसो से घंटा नही होगा। पहली बार में गहन ज्ञान देने वाला बंदा तबसे मेरा दोस्त है नाम पूछोगे तो बड़ा छोटा सा है उसके शरीर की तरह स्वप्निल भोपाल ( मोटा भाई मूल रूप से टडा से है आदते भी बैसी ही है)
स्वप्निल के बारे मे लिखने से पहले लोगो से अनुरोध इसे अपनी रिस्क पर पढे वरना आपकी भावनाएं आहत होने का खतरा है। (बाकी सारे विवाद करैया झरिया और जैतपुर पंचायत में हल होंगे)।
स्वप्निल -नाम तो सुना ही होगा अब बो बात अलग है कि लोगो की तरफ से इन्हें कई नाम मिले दुकान गोदाम मोटे भोपाली मियां । एक एक नाम अपने कारणों से दिये गए पहले 3 नाम शरीर और अंतिम दो नाम अपने शहर के कारण । ।
खेर भोपाल से जैन साब टडा वालो का लड़का जयपुर आ तो गया लेकिन तब से उसकी जिंदगी में किरन्ति की शुरुआत हो गई। अब किरान्ति तो फैलती है सो इनकी किरान्ति कही और जगह न पाके शरीर मे फैल गई । और लोगो ने बेबजह इन्हें अलग अलग नाम दे दिए। दरअसल इनकी किरान्ति तो 10th (अबे हिंदी मीडियम वालो दसवीं पढो ) में ही शुरू हो गई थी जब इसने अपने पहले ब्रेकअप के टाइम पर अपनी एक्स से दिल को छू जाने वाली बात कही
बहन
बाकी गिफ्ट तो बापिस करती जा
वरना तेरी भाभी को क्या दूँगा।
बची किरान्ति को इन्होंने जयपुर में प्रयोग करना चालू कर दिया फिर एक दिन हम इसके दोस्त बन गए फिर का गई भैंस पानी मे आई मीन क्रांति खत्म 😂।
भाई को झूठ से नफरत है
लेकिन अगर कोई झूठी तारीफ कर दे तो उसे नई पता उसे किस्से नफरत है😜😜 ।
एक बार मैंने फालतू का ज्ञान दिया था इसे
जीवन मे पंगे लेते रहना चाहिये..सीधी सादी लाइफ में भला क्या रोमांच
लगे रहो भिड़े रहो
अगर असफ़ल हुए तो थोड़ी सी बेज़्ज़ती होगी
और अगर सफल हुए तो भोत सारी खुशी
सौदा बुरा नई है ।
इसी रोमांच के चक्कर मे लड़का जयपुर नई छोड़ पाया । गलत न समझे लड़का ssc की तैयारी कर रहा है।
बंदा कहता है कि अगर कोई तुमसे गलती की माफी मांगे तो तुरंत उसे माफ कर दो अगर बो बिना माफी लिए ही भाग लिया तो वो माफी तुमारे ही पास रखी रह जाएगी ।
5 साल साथ रहने कॉफ़ी पीने और साथ में घंटो बाते करने मे जो सुख था वो कही नहीं हम अक्सर बहसें करते थे एक दूसरे को गरियाने और गलती निकालने में मास्टर ।
वो तेरा कहना बड़ा याद आता है यार बाबा ये दुनिया बड़ी जालिम है तेरी अच्छाई को अखंड बेबकूफ़ी समझती है(चाहे तो chu #%@** भी पढ सकते है)
लड़का समझदार है और बहादुर भी इतना बहादुर की 1000 लड़कियों से रिजेक्ट होने का रेकॉर्ड बनाना चाहता है।
बहरहाल लड़का कहता है कि जबसे ये टेबलेट से पढ़ाई होने लगी है तबसे बो रिश्ते बनना बंद हो गए है जो किताब
मांगने या लौटने के बहाने बनते थे। एक दुखद प्रेम कहानी की याद😂😂😂
व्यक्ति के चेहरे के साथ साथ उसका दिल भी सुन्नर हो तो उसकी चुगली के लिए कोई पॉइंट नई बचता। बस भाई इससे ज्यादा न लिख पाऊंगा।
खेर कहा सुना माफ  तुम हो तो लगता है जैसे सब ठीक हो जाएगा । दूर रहने के बाद भी मिले मिले से लगते हो।
आएंगे फिर कभी हवेली पर बस तुम वो स्मारक की सी छत वाली ऊंची सी टंकी पर कॉफ़ी के दो कप लेते आना।
तुम्हारा
पीयूष शास्त्री
गौरझामर

सर्वदर्शी

और सिलसिले जब शुरू हो जाते है तो बस शुरू ही हो जाते है पता ही नहीं चलते रस्ते में कितने पड़ाव आते है और कितने कांटे ।मगर सिलसिलों को यह जो सिलसिला है वो यूँ ही जारी रहे (क्योंकि मेरे से ज्यादा कोई और भी है जो इन सिलसिलों का इन्तजार कर रहा है)   बैसे आज में जिस शख्स से रूबरू करवाने वाला हूँ उसे आप जानते भी याद भी ज्यादा करते है पर फिर भी कुछ नहीं जानते   ।।  अक्सर यूही होता है हम साथ में होते हुए भी अनछुए रह जाते है ।।  तो साहेबान कदरदान तैयार हो जाइये इन मोहतरमा से मिलने नाम तो समझ् ही गए होंगे।                                         सिद्धि भारिल्ल =उर्फ़ सर्वदर्शी उप्स उल्टा हो गया सर्वदर्शी भारिल्ल उर्फ़ सिद्धि उप्स डॉलर (इनके हस्ताक्षर का सुरुआति अक्षर डॉलर का चिन्ह हुआ करता है)भारिल्ल ।      ओके तो अब शुरुआत शुरू से करते है ।         तो दंतकथाओं में इनकी उत्पत्ति(अवतरण या अवतार' शब्द अपनी श्रद्धा के अनुसार चुन सकते है फतवा जारी होने तक) गुलाबी प्रदेश की सबसे पाश कॉलोनी में हँसते हुए मानी जाती है जी हाँ  बच्चे प्रायः रोते हुए भोकाल मचाते हुए पैदा होते है पर ये खातून मुस्कुराते हुए पैदा ओह सारी अवतरित हुई थी।                            वर्तमान निवास नारायण टॉवर के सबसे ऊंचे टीले पर जहाँ हँसते हुए इतराते हुए उबकाई लेते हुए (भारत की आम लड़कियों की तरह)मेरे पापा मेरे हीरो है और मैं पप्पा की परी हूं(हॉ बाकि हम् तो अपनी अम्मी के ठठरी के बंधे है) जैसे मन्त्र जपे जाते है।                                     गोत्र का कोन पूछे रिजर्वेशन न मिलेगा और न वो दिन बचे जब (इन्हें हम बहन न बोलते थे  )  इनके लिए लिए पटरियां उखाड़ते फिरे ।  (साले इस रक्षाबंधन की तो ऐसी की तैसी)           बेसे आम ब्यक्ति और इन जैसे अलफ़ोसो व्यक्ति में इतना अंतर तो होता ही है कि जहाँ हम् लोगो का बड्डे एक दिन में में पूरा हो जाता है इनके लिए ये पूरे हफ्ते भर चलने बाला अनुष्ठान होता है जिसकी पूर्णाहुति आज होती है।     केक पसंद है और चाको लावा ब्लैक फारेस्ट और डार्क फैंटसी खिलाने वाले को 1 महीने तक सभी गालियों और दुत्कार से छूट मिलती है चाहे जो उत्पात मचा लो।।         बैसे बुद्धिमान भी बहुत है अक्सर मेरे से एक बात बोलती रहती थी भाई ये अक्कड़ बक्कड़ बॉम्बे बो 80+90 पुरे 100 ये 100 कहा हुए 80+90ये तो 170 हुए   ।।  और भी इन्होंने बचपन में समझदारी के बहुत झंडे गाड़े बस मिल नहीं रहे ।।    छोरी होनहार है बहुत आगे तक जायेगी  ।                           दरअसल इसे लगता है बारिस में भीगना  जीवन की सुन्दर बातो में से एक है ।                            आर्ट और क्राफ्ट पेंटिंग की शौक़ीन है (इस बात की सत्यता जाँच ल ले , लेखक इस बात के लिए जिम्मेदार नहीं है बाकी जो भी विवाद होगा वो झरिया और करइआ की पंचायत में निपटाया जायेगा)                                    एक राज की बात बता दे की जैसे जैसे पेपर नज़दीक आते जाते है इनके अंदर का कलाकार जागने लगता है (पेपर के दिनों में इनसे बात करने का खतरा अपनी रिस्क पर ले)                              अब असल बात बता दे तो 3 साल तो इस जीव को अपनी क्लास में देखना बिलकुल अलग सा था ,है कोई  होगा  । पर 2nd ईयर में 12 12 बजे रात तक कंधे से कंधे मिलाकर विदाई में काम किया उसके बाद तो लगा ये लड़की भी आइडियाज का पिटारा है इमोसन्स और फीलिंग्स का भंडार है फिर शायद अपना लिया अपनी क्लास में बिलकुल अपनी तरह । कक्षा की एक मात्र लड़की होने पर भी इसे कोई आंच नहीं आई (ये प्राचार्य महोदय और sp चाचा का डर भी हो सकता है) ये मेरी ही क्लास का कमाल था । एक फ़रिश्ते की तरह मिली बहन जैसे झगड़ी और दोस्तों जैसे खिलखिला उठी यही तो थी अपनी सिद्धि बाई उप्स सर्वदर्शी बाई    ।।  तो बोलो मितरो जिज्जी की .....
पीयूष शास्त्री
गौरझामर

आकाश

संडे का दिन और बुखार, ऊपर से पेट का जानलेवा दर्द...
हम तो यूँ भी गालियां खाना छोड़ दिये थे...
ख़ैर, एक ही जान है या तो अल्लाह लेगा या मुहल्ला का डॉक्टर लोग और मेडिकल स्टोर वाला...!!!😂
ये सिरीज़ याद दिलाती है कि पीयूष कुछ लोग तुम्हारी दोस्ती की लिस्ट पूरी किये हुए है। बाकी एक बंदे  को सामने लाना था आप सबके बिल्कुल आँवले की तरह....
कुछ दोस्त स्पेशल होते हैं जिनके लिये आप पुर तकल्लुफ़ दावत का इंतज़ाम करते हैं। और कुछ दोस्त ऐसे होते हैं जिनको इन दावतों से पहले छोले राजमा कोफ्ते डीप मेरिनेट और फ्राई करने में मदद और दावत के बाद किचन समेटने और बर्तन माँजने के लिये बुलाया जाता है। ख़ैर, ये इज़्ज़त अफ़ज़ाई बाद के लिये रख देते हैं।
कुछ दोस्त लहरों की तरह आते हैं और चले जाते हैं, कुछ तूफानी, कुछ सुनामी पर कुछ केकड़े की तरह पंजे गाड़कर जम ही जाते हैं। ख़ैर ये भी फिर कभी....।
हाँ तो मैं बता  रहा था टडा के इकलौते दुश्मन (बेस्टी बे)
आकाश टडा--जिसे आप लॉकर की तरह इस्तेमाल कर सके ! जो आपके ऐसे गहरे क़ीमती ,गोपनीय राज अपने सीने मे दफ़्न कर सके जो आप अपने तक नही रख सके थे ! जो आपकी सारी शेखियों , बदतमीजियो का जानकार हो ! आपकी कमियों से वाक़िफ़ हो ! जो भले आपको आपके सामने तो गरियाता हो पर आपकी पीठ पीछे आपका बचाव करते वक्त सब से लड जाये ! जिसको लेकर आपको पक्का भरोसा हो कि वह है तो सब ठीक हो ही जायेगा !
जिससे मिलकर आप बच्चे हो जायें ! जिससे मिलकर लगे कि अरे ऐसी हँसी तो हम पता नही कब हँसे थे ! जिससे भले आपका मिलना कभी कभार हो पाये पर जो हमेशा मिला हुआ सा लगे । बस ऐसा ही है आकाश।
लड़का प्रॉपर उमरिया टडा के पास एक छोटे से गांव में रहता है
खेर किरान्तिकारी कदम तो बचपन मे ही उठा लिए थे भाई नवोदय से भागे हुए लड़के है(यहाँ पर आप जान ले कि नवोदय विद्यालय में प्रवेश लेने की प्रक्रिया बेहद कठिन है लड़का चयनित होने के बाबजूद लौट आया )
वो क्या है कि भाई किसी से डरते बरते थोड़ी है वो धार्मिक रुचि वाले इंसान हेंगे तो लौट आये(इस तारीफ की पार्टी बाद  में मिलने पर ले लूंगा)
एक बात कहूँगा भाई प्रेम के मामले में बड़े लकी रहे जहाँ नार्मल छोकरो की प्रेमिकाए कहती है कि -तुम मेरी किस्मत में नही मुझे  भूल जाओँ ।
लेकिन भाई की gf ने भाई से कह दिया था - तू पढ़ाई पर ध्यान दे प्लेसमेंट के बाद घर से उठा लिय्यो।
भाई आधे चिंता मुक्त तो इसी बात से हो गए ।
खेर लड़के ने असल क्रांतिकारी कदम 2012 में उठाया स्मारक में एंट्री मारकर ।
5 साल तक भयंकर भोकाली भसड़ मचाकर लड़के ने साबित कर दिया कि लड़के के नाना स्वतंत्रता की लड़ाई में किरान्ति किये थे ।
लड़का बहुत ज्यादा सब्र वाला है उसके सब्र का इससे ज्यादा सबूत क्या दू की fb पर उसने 3 दिन से 4 छोरियों की रिक्वेस्ट पेंडिंग में पटक रखी है ।
खेर लड़के से दोस्ती कब हुई कहना मुश्किल होगा पर इतना जानता हूं कि हम कभी बिना गालियां दिए बात नही करते और कभी भी बिना गले मिले बिना मिलते नई है ।
खेर आकाश जैसे दोस्त पैदा होते ही बेज़्ज़ती करने के लिए है बेज़्ज़ती करना जन्मसिद्ध अधिकार है भई।
भाई ने जब जब जलधारा या wtp या gt में कदम रखा तब तब उसे एक ही गाना याद आता है हाँ यहाँ कदम कदम पे लाखो हसीनाएं है...
बेसे लडके की रेखाएं बताती है लड़का 2 शादियां करेगा इसलिए तमाम लड़कियों से गुजारिश अपना no पहले से बुक करके रखे।(बाकी इन्ना प्रमोशन करने के लिए paytm पे कम से कम 1001 ₹ चढ़ा दिय्यो)
लड़का जहीन और ईमानदार है
दोस्ती में भी कमाल है
स्वभाव का अच्छा है
बातें भी शानदार करता है
कुल मिलाके बात ये है कि आकाश लड़का है और अच्छा है।(बस यार अब और ज्यादा तारीफ नई करूँगा नई तो लोग समझ जायेगे की तूने ये तारीफ कॉफ़ी कप के हैंडिल की नोक पर लिखवाई है)
बाकी एक बात भाई के द्वारा कही गई थी की जब बहुत सारी गालियां भी कम पड़ रही थी  संसार मे तब कलयुगी लड़कियों  ने freind zone नामक गाली का अविष्कार किया। ऐसे किरान्तिकारी ...***********(असंसदीय शब्द) लड़के को नमन है । बने रहो ज़िंदा 😘
अंत मे इत्ता
की शब्दो को लिखने में मैं बहुत माहिर नही हूँ
लेकिन यहाँ अच्छा लिख के साला कोनसा "घंटारत्न " मिल जाना है
बाकी जै हो
ज़िंदा रहे तो फिर बापस आएंगे

पीयूष शास्त्री
गौरझामर