भारतीय संस्कृति में कुछ चीज़े कभी कही नहीं जाती पर उनका महत्व बहुत होता है( मैं धार्मिक सिद्धांतो या कोई दार्शनिक बात नहीं कर रहा ) जैसे बिना कहे प्यार बिना कहे देखभाल और यक़ीनन ये बाते सबसे महत्वपूर्ण होती है दरअसल भारतीयो की सबसे खास आदत यही है की अबे प्यार है तो है कहने की क्या जरुरत | बिना कहे समझ जाओ तो ज्यादा ठीक है (बाकि कुछ चीज़े बोलते ही कबाड़ा हो जाती है )
खेर समय और परंपरा के हिसाब से एक और मंगलम का परिचय आपको देना है हाँ तो ये बेहद खास है मेरे लिए सीरीज में आप सबका स्वागत है और आज के लेख में आप मंगलम कक्षा के एक हीरे की खदान से लेकर तरासे हीरे तक की कुछ झलकियाँ देखेंगे |लड़के का नाम है शुभम बिलोंग करते है मड़ावरा से
शुभम मड़ावरा - एक दुबला पतला सा लड़का जब नन्दीश्वर(मेरा पहला होस्टल जो खनियाधाना शिवपुरी जिले में है ) में दाखिल हुआ तो देखके लगा नहीं की ये लड़का कभी मेरा दोस्त बनेगा पर वो बना | लड़के का नाम था शुभम जिसके आगे चलकर कई संस्करण जैसे मडू या मड्स हो गए पर लड़का इन सबसे प्रभावित नहीं हुआ लड़का गणित में तेज़ था सो हम उसके पंखा बन गए खेर ये हालात संस्कृत के मामले में भी रहे मडू संस्कृत में भी अव्वल रहा | मड़ावरा जैसे छोटे गाँव से आया लड़का जब नन्दीश्वर पंहुचा तो उसके सपनो को हवा मिली और जी उठे |
लड़के का हमेशा से मानना रहा है की रात जब सवसे गहरी होती है न बस उसके पार सुनहरी सुबह आपके इंतज़ार कर रही होती है और अगर सवेरा न हुआ तो तो समझ जाइये रात अभी बाकि है|
एक बहन और एक भाई के नीचें सबसे छोटा भाई है पर जिम्मेदारी बड़े भाई सी निभाते देखा है |
बात उस समय की है जब लड़के ने स्मारक (हमारा दूसरा होस्टल जो बापूनगर जयपुर में है) में प्रवेश ले चुका था और कनिष्ठ उपाध्याय(११वी ) के अर्धवार्षिक परीक्षाये शुरू हो चुकी थी पेपर संस्कृत का था और ११ बज चुके थे और खुदा गवाह है की हम बड़े जल्दी सोने वाले इंसानों में शुमार रहे है मड्स अपने सर्किट याने ज्ञायक के साथ सूत्र जोर जोर से रट रहा था हमने ज्ञायक से कहा भाई कट ले नींद आरेली है ज्ञायक से ये कहना था की मड्स बीच में बोल गया अबे तेरे बेड पे थोड़ी है फिर का हो गई लड़ाई इस लड़ाई के बाद बना मड्स का एक पक्का वाला दोस्त ज्ञायक (इनको पक्का दोस्त बनाने में हमारी साजिश थी )
लड़के का कहना है की यार बस में अगर सुन्दर सा चेहरा हो तो लम्बा सफ़र भी आसानी से कट जाता है
खेर लड़के के प्रेम प्रसंग भी चर्चित रहे है लेकिन जिन्दगी के पुरे मज़े लेने के बाबजूद लड़के ने संतुलन बनाये रखा बस इसी संतुलन में लड़के ने साबित किया की वो आखिर शुभम ही है |
लड़का फ़िलहाल शिक्षाशास्त्री के साथ साथ सिविल सर्विसेज़ की तैयारी कर रहा है |
लड़के से एक बात कहेगे हलाकि ये बात उसने ही मुझसे कही थी की यार तू अच्छा काम करेगा तो बुरे लोग हसेंगे और यदि बुरे काम करोगे तो सब हसेंगे . काम ऐसा करो जिससे तुम नया सीखो जो तुम्हे आगे बढ़ने में मदद करे |
पीयूष शास्त्री
गौरझामर