रविवार, 31 दिसंबर 2017

नव वर्ष

नूतन वर्ष तुम्हारा स्वागत
और तुम्हारा अभिनंदन
आओ आओ भले पधारो
आज हमारे भी आँगन

लेकर कुछ अच्छो के गुच्छे
और बहुत सी बचीं हैं बातें
तुम्हे सुनाने कुछ तारीफे
और साथ में कुछ तकलीफें
साथ जो आई पार समय के
उन सबको एक थाल में भरके
लेकर आये है इस आँगन में
कुछ बातें जो बीत चुकी है
और अभी कुछ होने को है
कुछ बातें जो अभी हो रही
उन सबको इक बार सुनाने।नूतन वर्ष ...

पिछले जो संकल्प लिए थे
कितना उनने हमको थामा
कितनी पूरी हुई प्रतिज्ञा
पथ से कितने हुए है बामा(बाई ओर/भटकना)
खेर सभी में कितना सच है
और खोखलेपन का लेपन
कितनी किसकी सीमाएं है
पीड़ाओं का कितना वेदन।। नूतन वर्ष

हमको तुम्हें बुलाना ही था
खुद से हम भी कितना छुपते
कुछ किस्से जो तुम्हे सुनाने
घाव पुराने कब तक सहते
खेर सभी जो किस्से मेरे
थोड़े धैर्य रखे सुन लेना
नूतन वर्ष जो आये तुम जो
उम्मीदों की वारिश देना
देना थोड़े मुट्ठी भर के
कुछ सपने आंखों में भरके
कुछ चीज़ें संघर्षों की भी
देना हमको खुश हो करके।। नूतन वर्ष
10.44 (31.12. 2017)
पीयूष शास्त्री
गौरझामर

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