यह बेहद खास है मेरे लिए आज फिर मौका है आप सबके सामने जज्बातों को रखने का। मौका है एक कड़ी को दूसरी कड़ी से जोड़ने का कुछ चीजें जिंदगी में हमेशा बेहतरीन होती हैं और यकीन मानिए आप लोगों का होना सच में बेहतरीन है आप सभी मंगलम प्रतीकों की तरह हैं जो हमेशा हमेशा प्रेरणा का काम करते हैं आप है तो यकीन रहता है कि हां सब ठीक है कुछ चीजें जिंदगी में बेहतरी के लिए होती हैं और स्मारक जाना और स्मारक में 5 साल बिताना वहां पर नई यादें बनाना किसी खुशनुमा सपने की तरह है पर यह सपना नहीं है यह वाकई सच है और आप सब इस सच के साझेदार हैं तो आइए इस श्रंखला के नए लेख से मुलाकात करते हैं।
सिद्धार्थ मुगावली- हां तो बात उस जमाने की है जब दोस्तों में सॉरी और थैंक्यू नहीं होते थे बल्कि केवल गालियां होती थी उस जमाने में कंधे पर बैग डाले हाथों में बोरिया-बिस्तर लिए एक लड़का स्मारक में दाखिल हुआ ध्यान रखें लड़के को किरान्ति करनी थी फिर क्या हाथों की आस्तीन ऊपर चढ़ाई और जोर से बोले अबकी बार मोदी सरकार फिर क्या अंतर मोदी सरकार जीत गई खैर सिद्धार्थ मुगावली उन चुनिंदा प्राणियों में से हैं जो स्मारक में रहकर डबल डिग्री ले पाए डिग्री के चक्कर में भैया एक बार 10 दिन के लिए बिना बताए हॉस्टल से गायब थे मेरे रिकॉर्ड में यह पहली बार था जब कोई बंदा बिना बताए गायब होने के बावजूद स्मारक से नहीं निकाला गया खैर लड़का बुद्धिमान हैं और इनोसेंट भी वह कहता है कि दोस्ती का पहला और आखरी उसूल है कि जान देना पर इज्जत बिल्कुल नहीं देना.
भाई को किताबें पढ़ने का शौक है पर मोबाइल किंडल या टेबलेट पर नहीं क्योंकि इस लड़के का कहना है कि जिस चीज को सिर पर रख कर ना सो सकें उसे पढ़ने में कोई मजा नहीं है।
बचपन को लेकर भाई कुछ ज्यादा सीरियस हैं बचपन के बारे में लड़का कहता है कि ठोड़ी गाल घुटने कोहनी माथे पर कोई निशान नहीं है तो क्या तुमने घंटा बचपन जिया है
बाकी भाई मोदी भक्त रहे हैं और कट्टर वाले भक्त रहे पर मुझे आज तक समझ में नहीं आया कि खुद की मुल्लो जैसी दाढ़ी होने के बावजूद यह उन से इतनी घृणा क्यों करते हैं ।
बाकी सिद्धार्थ के संदर्भ में एक बात समझ लेने लायक है कि भाई अच्छा आदमी है और इतना अच्छा आदमी है की हर समस्या का समाधान कर देता है हालांकि बाद में लोग कहते हैं कि ऐसे तो समस्या ही अच्छी थी ।
दरअसल सिद्धार्थ का असल जीनियस तो यह है कि वह कहता है कि इस छोटी सी जिंदगी में जिंदगी को ढूंढ लेना बड़ी बात है
अब सिद्धार्थ के बारे में असली बात करें तो लड़का दिल का बड़ा साफ है हमने भी गुजारे हैं साल भर के दिन इस लड़के के साथ खैर अच्छी यादें पुरानी शराब की तरह होती हैं जितनी अच्छी और पुरानी उतनी ज्यादा नशीली
खेर आज भी याद है वह सरसों का तेल जिस की बदबू पुरे रूम में रहती थी
वह मुल्तानी मिट्टी जो तू हर संडे अपने चेहरे पर लगाता था खैर वह दिन यादगार थे अब लड़के के बारे में कुछ बिंदु जो आपको समझ लेनी चाहिए लड़का मोदी भक्त हैं अगर आप नोटबंदी जीएसटी आधार कार्ड के बारे में मोदी जी को सिद्धार्थ के सामने कोसने वाले हैं तो ऐसा ना करें ऐसा करना आपके लिए घातक हो सकता है फिलहाल लड़का इंदौर में है सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहा है बाकी प्यार पहुंचे लड़के
पीयूष जैन Shastri
मंगलवार, 19 दिसंबर 2017
सिद्धार्थ
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