रविवार, 10 दिसंबर 2017

वैभव

कभी कभी मैं सोचता हूं कि अगर कुछ लोग हमारी  जिंदगी मे न आते तो हमारी जिंदगी के मायने कैसे होते । दरअसल कुछ बंदे हमारी जिंदगी में ऐसे आते है जो हमारे जीने के मायनो को बदल देते है जिंदगी को जीना सिखा देते है जिंदगी से रूठना नहीं बल्कि जिंदगी से इश्क़ करना सिखा देते है 5 सालो की जिंदगी हमारी सारी जिंदगी को बना देती है हमारे जीवन का प्रत्येक पल केवल 5 साल की लाइफ से इंस्पायर होता है असली बात ये है कि रोजाना लाखो कहानियां लेखकों की तलाश में भटक रही है लाखो कहानियां मर खप चुकी है कहानियां भी पेड़ पौधों मनुष्यो की तरह जीती है और मर जाती है पर मैं नही चाहता कि मेरे किसी दोस्त की कहानी कभी मरे बल्कि उनकी कहानी उनके जीने के तरह हमेसा जिंदा रहे जिंदादिल ऐसे ही कुछ दोस्तो के नाम ये सीरीज़ ये बेहद खास है मेरे लिए शुरू कीगई जो अब तक कुछ दोस्तों को आपसे मिला चुकी है अब फिर बही मौका है कि फिर एक मस्तमौला साथी को अपनी उंगलियों से बारिश की बूंदों जैसा महसूस किया जाए ।लौंडे का नाम है वैभव गोरमी गोरेलाल
वैभव - वैभव की वैभव गाथा सुनाने से पहले एक छोटी सी लव स्टोरी सुनाता हूं
मैं तेरा बॉयफ्रेंड तू मेरी गर्लफ्रेंड
बो मेनू केंदी नाना नाना
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अब रिजेक्ट  करना ही था तो सीधा मना कर देती / भैया बोल देती । लेकिन नई खुद नातिन बन गई और मुझे बाप बनने से पहले नाना बना गई
(#एक_दुखद_प्रेम_कहानी)
हाथ मे कॉफी का कप पकड़े हुए वैभव ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा था हम हँस पड़े और वैभ गुस्सा हो गया और हाथ में पकड़ी कॉफ़ी को जाम की तरह एक सांस में गटकते हुए मुझे ऐसे देखा जैसे मैने उसका ब्रेकअप करा दिया हो खेर रोग की जड़ खासी और झगड़े की जड़ हासी
3 साल बाद गुस्सा निकला और ऐतिहासिक द्वंद हुआ जिसे वैभ की जीवनगाथा में बड़ा महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त होगा। उस ऐतिहासिक द्वंद की प्रमुख शब्दवली *बैडमिंटन गुस्सा लड़ाई रूम खिड़की कांच खून काली आंख समझौता* (।घटना के बारे में और अधिक जानने के लिए श्रद्धा के अनुसार पार्टी भोज नेग लिफाफा(कम से कम ₹1101) लेखक को दे और कॉफ़ी पीते हुए जानकारी प्राप्त करे)
सन 2012 जून की 29 तारीख सुबह का टाइम एक लड़का स्मारक में आया जिसे इतिहास बदलना था और बड़ी कसके किरान्ति करनी थी  5am बज चुके थे लड़के की आंखों में नींद थी उसने आसपास नज़र दौड़ाई
उसे बाबूभाई हाल दिखा वहाँ पर गद्दे फिर क्या इतिहास और किरान्ति को जेब मे रखते हुए लड़का गद्दे पर लुढक गया । पूत के पाव पालने में ही दिख जाते है तदनुसार वैभ की सोने की आदत 5 साल तक बनी रही ।अब आप गलत बिल्कुल न समझे बल्कि वैभ के सपने बड़े थे जिन्हें देखने मे लंबा टाइम लग जाता था और हम नादान ये सौचते थे कि वैभ ज्यादा सोता है।
गेहुआ (बिल्कुल अंग्रेजों जैसा कलर) रंग उसपे कत्थई आंखे लोगो को यकीन दिलाने के लिए काफी था कि ये अंग्रेज़ है, पर बेड़ागर्क वैभ के मुखारविंद से बू तईं जम्पे बम्पे जैसे शब्दों की धारा बहती देख लोग ,अंग्रेज संग सेल्फ़ी लेने का विचार त्याग देते।
वैभ अपने आप में अनूठा व्यक्तित्व है एक ऐसा साथी जिसे आप हमेशा अपने दिल के एक हिस्से में बचाये रखते है
वैभव के बारे में एक खास बात वो एक बार मे किसी के समझ नई आता बल्कि आप धैर्य और शांति से ही इस हीरे की पहचान कर सकते है
दही चिप्स वैभ का मुख्य आहार है
एक बात जो वैभव ने मुझसे कही थी जिंदगी जबरदस्त है इसे जबरजस्ती न जिये बल्कि जबरदस्त तरीके से जिये ।
ये वैभव की ही बुदिमत्ता है ।
एक पीयूष नाम के लड़के जिसे सब लोग बाबा कहते है ने वैभव को एक मैसेज भेजा है
यार हम साथ रहे जी भर के रहे हम साथ जिये और जी भर के जिये ।
हम लड़ते थे साथ लड़ते थे खून निकलने तक लड़ते थे इसके बावजूद हम दोस्त थे शायद ये बात हमारे आने वाले बच्चे न समझ पाए इसलिए तुम उन्हें बताना असली दोस्ती के मायने । की लड़ कर भी एक दूसरे के दोस्त कैसे रहा जाता है । भावनाएं हमेशा प्यारे शब्दो मे ही नही होती बल्कि कुछ गालियों के बिना भी दोस्ती आधी ही रहती है वो क्या है कि सच्चे वाले दोस्तो से इज़्ज़त से बात करना दोस्ती की सबसे बडी बेज़्ज़ती होती है।

बस चलते रहो यूँ भी जिंदगी की रेस में रुकना ठहरना थमना मना है
खेर कहा सुना माफ भाइयो जिंदा रहे तो कल फिर भसड़ मचाएंगे

                     पीयूष शास्त्री
            गौरझामर
          क्रमशः

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