बुधवार, 11 जुलाई 2018
खत
सोमवार, 2 जुलाई 2018
कायनात
बुधवार, 9 मई 2018
बूढ़े और बच्चे
दरअसल हर पुरानी पीढ़ी को अपनी नई पीढ़ी में नुक़्स दिखाई देता है और हर नई पीढ़ी अपनी पुरानी पीढ़ी को कमतर आंकती है , खैर यह कोई नई बात नहीं है पर हमें शुरू से सिखाया जाता है की आप केवल अपनी बात कहें दूसरे की बात सुनना तो हमें सिखाया ही नहीं जाता । आज जो परेशानी है की बच्चे अपने बूढ़ों से परेशान हैं बूढ़े अपने बच्चों से क्योंकि बूढ़ों को लगता है कि हमारे जो बच्चे हैं वह हमें तवज्जो नहीं दे रहे और बच्चों को लगता है कि हमारे जो बूढ़े हैं वह हमारी आजादी में दखल दे रहे हैं दरअसल यहां पर कोई किसी की गलती नहीं है बल्कि बस समझदारी की कमी है बच्चों को समझना चाहिए कि बूढ़े भी अब तवज्जो के हकदार हैं और बूढ़ो को भी समझना चाहिए कि बच्चों की आजादी उनके लिए सबसे अच्छा तोहफा है।
तो खुद को इरिटेट होने से या फिर दूसरों को दुखी करने के बजाए आप थोड़ी सी समझदारी से काम लें बच्चे अपने बूढ़ों को थोड़ी तवज्जो दें और बूढ़े अपने बच्चों को आजाद रहना सिखाए।
रविवार, 7 जनवरी 2018
दीदा
मंगलवार, 2 जनवरी 2018
एक रेजोल्यूशन ऐसा भी
कल सवेरे से मेरे मन में था नए वर्ष पे कुछ कहना है ये बाते खुद से और आपसे नए वर्ष के पहले दिन बीमार हो गया तो कुछ कह न पाया और आज सवेरे से व्यस्तता ने कुछ कहने न दिया..
खैर नया वर्ष आ चुका हैं मनाने वालो ने कुछ न कुछ रेजोल्यूशन लिए होंगे ,कुछ नए वर्ष का विरोध करने में मशगूल होंगे , तो कुछ बस इन सबके बीच में फसे होंगे ।
सो पहली बात
रेजोल्यूशन के नाम पे अक्सर हम कुछ आदतों कुछ बातों और कुछ अच्छे कामो की लिस्ट बना लेते है और उन्हें भरके किसी कचरे के डिब्बे में डाल देते है मतलब उन्हें पूरा नहीं करते , क्योकि ये महज़ भावुकता में लिए फैसले होते है ।(हो सकता है कोई दृढ़ता से इनका पालन भी करता हो उसके लिए साधुवाद)
लेकिन इस बार कुछ नया ट्राय करते है हम अपना गोल डिसाइड करते है कुछ सपने बनाते है तुच्छ बातों चीज़ों से उठके सोचते है चाहे तो इसके लिए वक्त ले पर इसे करना बेहद जरूरी है ।
गोल बनाये और उसपर चले बस इतनी सी बात
बात यकीनन सरल नई है पर सरलता से जीने के लिए इसे करना बहुत जरूरी है ।
बाकी जो रेजोल्यूशन लिए उनके लिए तालियां
लेकिन गोल इनमें सबसे ऊपर
अब दूसरी बात
इस साल हम मौन तोड़े
ये बात सच है मौन विश्व की श्रेष्ठतम बातों में से एक है पर अपराधियों की संख्या में इज़ाफ़ा करने में इसका बड़ा हाथ है मौन तभी सार्थक है जब इसका उपयोग भलाई के लिए हो , शक्ति होने पर भी हम झमेले में क्यों पड़े इसके लिए मौन है तो ये अपराध करने जितना बेकार है ।
खेर दूसरा बिन्दु समझ ही गए होंगे की बुरे काम होते देखे तो चुप नहीं बैठे , आपकी एक आवाज़ बहुत कुछ कर सकती है अपराधियों का मनोबल तोड़ सकती है और बाकियों का मनोबल बड़ा सकती है ।
बाकी नया वर्ष मुबारक हैईहै
पीयूष शास्त्री
गौरझामर
