शुक्रवार, 23 जून 2017

ये बेहद खास है2

एक लड़का रात के बारह बजे आया और लगभग चिल्लाते हुए बोला
उसने बातचीत बंद कर दी इल्ज़ाम था टॉपिक नही है बतियाने को ,!साला टॉपिक लाकर प्यार करना है या राजनीति| 
हम चुप ही थे लेकिन ये सुनके हँस पड़े। हमें का पता था कि ये मैटर थोड़ा सीरियस वाला है(लड़के का अभी ब्रेकअप हुआ था) हमारा हँसना था कि लड़का नाराज़ हो गया और रूम से बाहर भाग गया और हम का करते सो ओढ़ रजाई सो गए पर लड़का तो नाराज़ था  सो अंगले दिन मोहन जी की कड़क कॉफी पिला के मना लिए । अब क्या है कि  अपने इंडिया में जाने कित्ति सारी परेम कहानी एसई टॉपिक खत्म होने पे टूट जाती है ये लड़का भी अपनी जिंदगी की पहली परेम कहानी खत्म हो जाने पर बड़ा सीरियस वाला दुखी हो गया और फिर उसने डिसाइड किया कि वह अपने टॉपिक के दम पर अपनी बहुत सी परेम स्टोरी बनाएगा कुछ सालों बाद उसने कई परेम स्टोरी बनाई और बहुत साल बाद वह लड़का मेरे पास फिर आया और बोला बाबा भाई इन लड़कियों को सिर्फ एक चीज़ चाहिए परेम के नाम पर बाते और केवल बाते हम आश्चर्यचकित थे लड़के की उन्नति पर
कहानी खत्म पैसा हज़म
नोट-इस कहानी का विशाल ग्वालियर से कोई संबंध नही है
ओह हाँ तो इस बार एक ज़िंदा इंसान का परिचय देने का मन बनाये है पर ये मछली जरा बडी है छोटे जाल आएगी नही। इसलिए आधा अधूरा ही मिलेगा परिचय तो उस जिंदादिल खूबसूरत हसीन शख्स का नाम है विशाल ग्वालियर

विशाल ग्वालियर - इसकी कहानी शुरू होती है महाराष्ट्र से इनके पूर्वज मराठी थे पर बचपन मे ही इन्हें ग्वालियर आना पड़ा और फिर ग्वालियर में ही बस गए फिलहाल इनका ठिकाना सोडे के कुए के पास किले अंदर सबसे पुराना अड्डा है जहाँ इस सरकार का कुछ न हो पायेगा और आजाओ कमीनो सबको तोड़ दूंगा जैसे मंत्र जाप में बोले जाते है। आप जब मिलेंगे लड़के से तो पता चलेगा इसके खून में जरा ज्यादा गर्मी है इसका भी एक राज है होंगे फ्री तो खोलेंगे वह राज पूरे इत्मीनान से।

लड़का होनहार है और प्रतिभा तो कूट कूट के भरी है अब बो अलग बात है कि उसे जरा बारीक कूट दिया कि बाहर निकल ही नही रही

ग्वालियर की गलियों से अमायन और फिर अमायन से खनियाधाना तक का सफर आसानी से हो गया और सारे बालकांड यहाँ सहेज लिए गए ओर आप अगर जायेगे अतीत की गलियों में जहाँ काले कुत्ते रहते है तो पाएंगे कि  जिंदादिल इंसान को जिंदा होने में कितना कुछ सहना पड़ता है (सॉरी डोंट वी सीरियस पीयूष)

हाँ तो एक बार अतीत की राहे जिनमे काले कुत्ते रहते है उन कुत्तो ने विशाल को घेर लिया फिर क्या हमने गली के बगल बाले घर से रस्सी डालकर विशाल को 14 इंजेक्शन लगवाने से बचा लिये।

बंदा बड़ा शरीफ है आप इसकी शराफत का अंदाज़ा इस बात से लगा सकते है कि जहाँ भी ताज़ा बना फर्श देखते है तो धीरे से अपनी चप्पलों के निशान छोड़ आते है ।
दरअसल इस लड़के का कहना है कि अच्छी बातें तो सबको अच्छी लगती है पर जब किसी की बुरी बात भी अच्छी लगने लगे तो समझ लेना कि प्यार नही हुआ है बे बेज़्ज़ती सहने की आदत हो हो गई है।

विशाल लोगो की भावनाओं का रायता बनाता है और फिर लोग विशाल की भावनाओ का मुरब्बा बना देते है btw विशाल चल रहा है मै चल रहा हूँ मै रुक रहा हूँ विशाल रुक रहा है हम दोनों अपनी तरह चल रहे है अपनी तरह रुक रहे है
चलना और रुकना एक क्रम है जो चल रहे और चले ही जा रहा है
दोनों को ही एक दिन मुकम्मल रुकना है अब देखना ये है कि हममें से पहले कोन रुकता है
एक ऐसा दोस्त जिस पर आप हमेशा आंख मूंद कर भरोसा कर सकते है खास तौर से जब आप किसी से भिड़ने जा रहे हो । एक ऐसा भाई जिसे आप कभी भी गले लगा सकते है हा हम लड़े और खून निकलने तक लड़े पर अँगली सुबह मिले तो बही बदमिजाज और खुले अंदाजों में एक दूसरे को गाली देते हुए साथ ही मन मे लड़ाइयों को भूलते हुए
भाई बड़ा मितव्ययी है क्योंकि एक बार
भाई ने इजहार ऐ इश्क़ कर दिया टेलीफोन से
लाख रुपये की बात थी दो रुपये में हो गई

अगर खूबसूरत होना गुनाह है तो ये बंदा गुनहगार है
और चेहरे की खूबसूरती से ज्यादा सुंदर है इसका दिल जो किसी को भी इसका दीवाना बना देता है।
फिलहाल भी से एक बात कहूंगा
जब तक आप अपनी औकात से भिड़ नही जाते
लोग आपको आपकी औकात याद दिलाते रहेंगे

उन्नत भवः
                                                                           ।।                    पीयूष शास्त्री।    
                         गौरझामर
                            क्रमशः

शनिवार, 17 जून 2017

ये बेहद खास है

चलो यार सपने देखते है अपनी जिद के ,चलते है फिर उसी गली में जहाँ इमारते सपनो की मिट्टी से बनती है जहाँ हकीकत की गर्मी से बेपरवाह वक्त की उम्मीदों की ठंडी ठंडी हवाएं चलती है बेहतर कल के साये तले कुछ ज़िद्दी लोगो की नींदे सोती है।                         मैं  जानता हूँ कि ये आसान नही पर तुम्हे आसान काम पसंद कहा है चलो एक बार फिर पागलपन करे जो सच मे पागलपन है चलो फिर एक सपना देखे ।।                ऐसे में अगर कोई समझदार सच की कहानियां सुनाकर डराए तो बेहिचक आ जाना मेरे पास, में तेरे कंधे पे वही नर्म हाथ रखूंगा और कहूंगा *टेंसन न ले देख लेंगे यार*    ।।                           तो इस बार *ये बेहद खास है मेरे लिए*सिरीज़ में ऐसे ही एक पक्के वाले दोस्त यार जिसे आप हमेशा सहेजना पसंद करेंगे का परिचय देने जा रहा हूँ लड़के का नाम है ज्ञायक और ये लौंडा है अमरमउ से ।।                            *ज्ञायक*- ये नाम सुनते ही जहन में एक जहीन सा दुबला पतला सा लड़का याद आता है जो हर मुश्किल को कभी सीरियस नही लेता हाँ ये जरूर है कि ये डॉक्टरी अच्छी कर लेता है मैं ज्ञायक से स्मारक में मिला एक आत्मविश्वास से भरा लड़का जो अपनी आंखों में कुछ जिन्दा सपने लेकर चलता था (दरअसल मुझे यहाँ है लिखना ज्यादा अच्छा लगता ) पर साथ ही अपने साथ एक बेपरवाही को लिए हुए ।।                                  सामने बात करता तो लगता था किसी खुरदुरी चीज़ को आप टटोलने की नाकाम कोशिश कर रहे है।।                                    एक सपने की भूख तब तक पूरी नही होती जब तक वह अपनी मंजिल को प्राप्त न हो जाये  ।।   इसकी आंखों में वही भूख और खुशी की झलक देख लेना कभी आप महसूस करेंगे एक गीला समंदर और उसकी साफ लहरों को ।।                 चलिए इत्ती सारी बाते पचाना सरल नई होगा पर जयपुर आके ज्ञायक को बड़ी कस के  किरान्ति  करनी थी वह चला ही जा रहा था इस उम्मीद के साथ कि अब किरान्ति की आखिरी सीढ़ी पर ही जाके रुकूँगा और जब   तक मंज़िल मिल नही जाती चलता ही रहूंगा।   ज्ञायक आगे बढे ही जा रहा था बढ़े ही जा रहा था फिर अचानक रास्ते मे चाय की थड़ी आ गई 😋   फिर क्या ज्ञायक चाय पीने रुक गया।।।।।                              बचपन मे ज्ञायक दुबला नही था उसने बड़ी मेहनत से खा पीकर अपना शरीर बनाया था लेकिन कीड़े पड़े इस mp की गर्मी में जो उसकी सारी मेहनत पसीने   में वह गई।        ।।                 बहरहाल ज्ञायक का जिंदगी के बारे में एक शानदार खयाल है कि *जिंदगी क्या है भटुरो के साथ मिलने वाले    छोलों में कोने में पड़ा काला चना* चलिए तो एक दोस्त है इनका *शुभम मड़ावरा*       उधर वासेपुर जल रहा था मगर इधर अपनी पाल्टी में दोस्ती का एक नया अध्याय लिखा जा रहा था...बात पुरानी है! रामाधीर सिंह(शुभम मड़ावरा) और शेरखान(ज्ञायक अमरमऊ ) की दोस्ती तब हुई जब दोनों के हाई स्कूल के एग्जाम शुरू होने वाले थे और दोनों का सेंटर एक ही था। इतिहास गवाह है बाबा( ज्ञायक)को केमिस्ट्री तब नहीं आती थी और रामाधीर (शुभम मड़ावरा)को हिंदी और इंग्लिश आज भी नहीं आई। दोनों लोग साथ इमली और चूरन खाते हुए एग्जाम से चंद मिनट पहले, बहुत सीरियस होकर पढ़ाई करते थे। ख़ैर रिजल्ट के बाद दोनों की दोस्ती और गहरी हो गयी आज भी दोनों अक्सर ही जय जिंनेंद्र वाले के यहाँ कोटा कचोरी खाते हैं.भगवान करे इनकी दोस्ती को किसी लड़की की नज़र न लगे । बेसे ज्ञायक के बारे में एक बात और कहूंगा इसका दिल बड़ा साफ है सो लड़कियां बेहिचक try मारे ।।