कल सवेरे से मेरे मन में था नए वर्ष पे कुछ कहना है ये बाते खुद से और आपसे नए वर्ष के पहले दिन बीमार हो गया तो कुछ कह न पाया और आज सवेरे से व्यस्तता ने कुछ कहने न दिया..
खैर नया वर्ष आ चुका हैं मनाने वालो ने कुछ न कुछ रेजोल्यूशन लिए होंगे ,कुछ नए वर्ष का विरोध करने में मशगूल होंगे , तो कुछ बस इन सबके बीच में फसे होंगे ।
सो पहली बात
रेजोल्यूशन के नाम पे अक्सर हम कुछ आदतों कुछ बातों और कुछ अच्छे कामो की लिस्ट बना लेते है और उन्हें भरके किसी कचरे के डिब्बे में डाल देते है मतलब उन्हें पूरा नहीं करते , क्योकि ये महज़ भावुकता में लिए फैसले होते है ।(हो सकता है कोई दृढ़ता से इनका पालन भी करता हो उसके लिए साधुवाद)
लेकिन इस बार कुछ नया ट्राय करते है हम अपना गोल डिसाइड करते है कुछ सपने बनाते है तुच्छ बातों चीज़ों से उठके सोचते है चाहे तो इसके लिए वक्त ले पर इसे करना बेहद जरूरी है ।
गोल बनाये और उसपर चले बस इतनी सी बात
बात यकीनन सरल नई है पर सरलता से जीने के लिए इसे करना बहुत जरूरी है ।
बाकी जो रेजोल्यूशन लिए उनके लिए तालियां
लेकिन गोल इनमें सबसे ऊपर
अब दूसरी बात
इस साल हम मौन तोड़े
ये बात सच है मौन विश्व की श्रेष्ठतम बातों में से एक है पर अपराधियों की संख्या में इज़ाफ़ा करने में इसका बड़ा हाथ है मौन तभी सार्थक है जब इसका उपयोग भलाई के लिए हो , शक्ति होने पर भी हम झमेले में क्यों पड़े इसके लिए मौन है तो ये अपराध करने जितना बेकार है ।
खेर दूसरा बिन्दु समझ ही गए होंगे की बुरे काम होते देखे तो चुप नहीं बैठे , आपकी एक आवाज़ बहुत कुछ कर सकती है अपराधियों का मनोबल तोड़ सकती है और बाकियों का मनोबल बड़ा सकती है ।
बाकी नया वर्ष मुबारक हैईहै
पीयूष शास्त्री
गौरझामर
मंगलवार, 2 जनवरी 2018
एक रेजोल्यूशन ऐसा भी
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