यादों के पक्षी बड़े दुष्ट हो गए है वो तो उसी डाल पे जाके बैठते है जो यहाँ से दूर है उन्हें कहाँ पता कि दोबारा घर पे आने में हमें कित्ता सारा टाइम लग जाता है ।
अब वो बरसो बाद विदेश से आकर एक दिन चुपके से आकर बीते समय को दिल मे छुपाके मेरी आँखों पर अपने हाथों को रख कर पूछता है
.बता कोन
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.हम भी जोर से बोले
आ गया पागल
और उसे गले लगाने के लिए आगे बढे ।
लेकिन बेड़ागर्क बिस्तर से नीचे गिर गए और अपने कंधे को घायल करवा बैठे है। नमक के पानी से सिकाई के बाद अब आराम आया है।
समय की नजाकत तो यही कहती है कि बंदे का परिचय दे दिया जाए पर अंदर का लेखक कहता है थोड़ी और जिज्ञासा बनाई जाए चलिये वक्त की नज़ाकत को समझो और आगे बढ़ो तो इस बार आपके सामने मुहाजिर है अरिहन्त देल्ही उर्फ arren
अरिहन्त दिल्ली -कई बार आपको तीखा खाने के बाद मीठा खाने की इच्छा होती है बस वो मीठा अरहंत है ।
अरहंत के ज्ञान का तजुर्बा मुझे तब हुआ जब हम पहली बार मोती पार्क को जा रहे थे और एक कार के बाजू से निकलने पर मैले पानी से हम नहा गए तब एक लड़का आके बोला । वाहन के बगल से गुजरते ही जब छींटे आपको स्पर्श करते है तब जो अपशब्द आपके हृदय में उत्पन्न होते है वो बड़े शिद्दत वाले होते है। हमने भाई की बात मान ली और हम दोस्त हो गए।
क्लास 10th की बात है(हिंदी मीडियम वाले कक्षा दसवीं समझे) अरहंत ने 9 cgpa स्कोर किया अब वो का है कि *इंग्लिश मीडियम वालो को उन्यासी ओर नवासी का कनफूजन नही होता और हाँ अठत्तर उनहत्तर का झमेला भी नई होता।* किरान्ति करने की भसड़ भी कभी कभी मच जाती है सो स्मारक में एडमिसन ले लिया पर इन्हें कहाँ पता था कि इनकी किरान्ति के यज्ञ में पानी गिर गया और धुंआ धुआँ हो गया। जयपुर में आके बदनाम भी हुए पर पता नई चला कि ईं लड़का बदनाम है । अब हम तो दोस्त थे तो बदनामी का असर हममे क्या पड़ता ,हमे तो लड़के की एक बात याद है कि *बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा।* नाम करते करते 1st ईयर तक किरान्ति के यज्ञ में गिरा पानी धुंए से उड़ गया तो एक बार फिर आग लग गई और सेकेंड ईयर में राजा ने घर पदार्पण कर लिया ।
3rd ईयर में भाई को फिर सद्बुद्धि आई और फिर से स्मारक में आ गए शायद ये स्मारक के इतिहास की गिनी चुनी घटनाओं में शुमार होगा।
*भाई बेहद हुशियार है पर मज़ाल है किसी को पता चलने दिया हो* ।
भाई को सब्जियों के नाम पर शाही मटर पनीर बड़ा पसंद है इसलिए शायद ये बात उन्होंने कही थी कि *काश सब्जी के भी हाथ पैर होते तो सब्जी थाली में से उठकर भाग जाती और मैं मटर को आवाज़ लगाता तो बो अपने कंधे पे पनीर को बिठा के मेरी थाली में दौड़ा दौड़ा चला आता।*
भाईजान की कित्ति gf है या नई है मुझे क्या किसी को नई पता, पर शक तो पूरा हइहै।
व्यक्तिगत तौर पर अरहंत एक शानदार दोस्त है जिसे आप हर मौके पे याद कर सकते है जिसे सम्हाला जाना बेहद जरूरी है ताकि अँगली पीढ़ी को बताया जा सके कि जीने के लिए उधार के नही अपने नियम बनाना कित्ता जरूरी है।
एक ऐसा खूबसूरत इंसान जिसकी आंखों में मैंने कई बार घुमड़ते बादलों को बहते देखा ।
कुछ बाते होती है जिन्हें आप राज और अपना बना के रखना चाहते है अरिहन्त उनमे से एक है।
एक ऐसा दोस्त जिससे बिना गालियों के बात करना गालियों का अपमान करना है।
इस पर पिछले बार की एक कॉफ़ी उधार है(हमेशा उधार ही रहेगी चाहे कित्ति भी पिला दे)
* *ए कॉफीगर
एक भगोनी ले उसमे आधा गिलास दूध डाल, 2चम्मच शक्कर और इत्तू सी कॉफ़ी डाल और गैस पर चढ़ा दे। थोड़ी देर तपाकर मेरे गिलास में बतौर उधारी डाल दे।**
बड़े की एक विशेष बात है कि
इनकी *जब किसी से बहस खत्म हो जाती है उसके बाद ही इन्हें सारे अच्छे अच्छे जबाब याद आते है।*
भाई को शादी का बड़ा शौक है इस मामले में बस एक बात कहूँगा
उसको जब गुस्सा आता है तो लौकी खानी पड़ती है और खुश हो तो तोरई
मन स्थिर होता तो कद्दू
बस यही जिंदगी होती है शादीशुदा की।
अंत मे एक बात कहते है कि प्लाज़ो और पजामा दोनों भाई भाई है अब बो बात अलग है कि पजामा सरकारी स्कूल से पढ़ा है और प्लाजो कॉन्वेंट स्कूल से।
मिलते है एक ब्रेक के बाद
तब तक do whatever you want to do
आप लोग किरान्ति जारी रखिये।
आपका अपना
पीयूष शास्त्री। । गौरझामर
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