रविवार, 15 अक्टूबर 2017

रिसAभ चर्चित

ये बेहद खास है
इस बार मे आपके सामने कुछ नया लाना चाहता था ये सब आपके लिए है जिसे में अपनी नज़र से पेश करूँगा
ये बेहद खास है सारे मंगलमो(mangalams) के लिए
ओये सब आ गए नेताजी गए यार अपना रिमांशु
अरे विजय तुम कंघी बाद में कर लेना
काके विको टर्मरिक फिर घिस लेना
गोलू भाभी से बात बाद में कर लिय्यो अबे इते आ जाओ
विशाल हाथ बड़े चमक रहे है ओहो बर्तन वाला काम
अनुभव इते सोइ खिलाओ चिप्स
वैभव को देखो आज भी सो रहा है
आओ रेगिस्तान के जहाज अपना सिर बचा के
चलो सब बैठ गए तो शुरू करते है में आप आपको दे रहा हूँ गुप्त सूत्रों से पता चली maglams से जुड़ी आदतें बाते अनुभव यादे और लम्हे
तो शुरुआत किससे चलो risabh से करते है

रिषभ- -कहने को ये दिल्ली से बिलांग करते है पर पांचवी साल तक आते आते दिल्ली बाली कोई बात नई रही। हाँ तो बचपन में दिल्ली के पास एक गांव में एक लल्ला पैदा हुआ तो बाहर से एक बाई बोली एक ब्रम्हचारी पैदा हुआ है ये लल्ला था ऋषभ । पैदा होने के पंद्रहवे साल तक इस राजकुमार का जीवन बड़े साधारण तरीके से बीता । स्मारक आने के बाद ये सीधे  कक्षा की वटु श्रेणी के प्रथम विद्यार्थी बने हालाँकि यहाँ भी लगभग 3 से 4 महीने इन्होंने बैराग्य के कोई लक्षण नई प्रगट किये बाद में जो हुआ उसके बाद ये पंडित विद्वान और न जाने किन किन महान सम्बोधनो से पुकारे जाने लगे । हालांकि भैया जी रागरंग से दूर रहने बाले है  फिर भी नृत्य करना बड़ा पसंद है और तो इस बालक के बारे में क्या कहे बालक होनहार है बुद्दिमान है हालांकि मुझे नही पता है कि बुद्दिजीबी होने के लिए कितने जीबी बुध्दि की जरूरत पड़ती है पर जितनी भी जरूरत होती है भैया जी के पास उससे  40 50 ग्राम ज्यादा ही होगी।

अब नंबर आता है इनके ही परम मित्र कहे जाने वाले चर्चित कुमार
#चर्चित = बचपन मे हमे पढ़ाया जाता था रेगिस्तान का जहाज़ को कहलाता है तब मेरे दिमाक में एक सबाल भोत जोर से आता था रेत में जहाज़ कोन चलाने की सोचेगा )अचानक बड़ी  जोर से आवाज़ आती थी ^ऊंट ^ स्मारक में करीब ढाई महीने रहने के  बाद एक बच्चा स्मारक में आया ।सुना था दादा के एक प्रबचन ने उसका जीवन बदल दिया। पर उसे सामने देखकर दिल औऱ दिमाक में एक ही आवाज़ बड़ी जोर से आई ओ रे ऊंट। स्मारक में आने के बाद पूरी सालभर इस रेगिस्तान के जहाज का आतंक पूरी क्लास पर छाया रहा दरअसल भैया जी बड़े बुद्धिजीवि में गिने जाते है लेकिन जब किसी लड़के से मज़ाक करते थे तो बंदा हैरान रह जाता था ये क्या हुआ
एक साल बाद अचानक एक चमत्कार हुआ और 12वी में 2 महीने बाद क्लास में मस्तियो में गिरावट देखी गई  सूत्रों के हवाले से खबर मिली कि चर्चित की किसी से दोस्ती हो गई है
हुआ यूं कि त्रिमूर्ति (अब पंचमूर्ति)जिनालय के आंगन में बैठे एक बच्चे को चर्चित ने देखा ये ऋषभ था दोनो में कुछ बाते फाते हुई बिचारो की अदला बदली हुई । ये साथ भैया जी को इत्ता पसंद आया कि बटु श्रेणी में एक नाम और जुड़ गया और इस मुलाकात ने 5 साल के इतिहास में दोस्ती की मिसाल दे जाने बाली जोड़ी में इन्हें तब्दील कर दिया (हालांकि इस क्लास में        ऐसी कई जोड़िया बनी है) ।
स्मारक के पांच साल के लंबे जीवन मे चर्चित ने अपनी प्रतिभा के लाजबाब नमूने दिखाए
। कभी समाज सुधारक कभी प्रेरक तो कभी बोर्डन बनकर
पर अंततः इनका समाजसुधार से मोहभंग} हो गया और ये अपने काम मे जुट गए ।
              पीयूष शास्त्री  
शेष मांग आने पर क्रमशः

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