रविवार, 15 अक्टूबर 2017

रिमांशु

खुली किताब के पन्ने यू ही उलटते रहते है
हवा चल न चले दिन पलटते रहते है
कित्ते सारे दिन बीत गए स्मारक को छोड़े हुए तुम सब लोगो को देखे हुए ,कमीनो बड़ी याद आती है तुम लोगो की तुम सब की जिनके साथ 5 साल के बडे कमाल के लम्हो को छुआ है और महसूस किया है। हर बंदे की कोई न कोई अपनी खासियत है हर बंदा अलहदा है बिल्कुल रत्नों की तरह जिनमे अपनी चमक हो अंदर से रोशनी आती हो। ये बेहद खास है मेरे लिए सिरीज़ इन्ही सब लम्हों को और बेहद खास यादों को आपके सामने लाने। का एक जरिया है मेरे लिए ।अभी वक्त हो चला है अपनी बात पे आने का सो इस लेख में  आपके सामने है रिमांशु लम्बा
रिमांशु लम्बाखोह - इधर पिटरोल से ड्राईक्लीन करवा के रखा कड़ाई वाला कुर्ता उन्होंने प्रेस के लिए भेज दिया उधर प्रेस से खबर आई कि इस बार लोटा उन्हें नही बब्बा को मिलेगा। खबर सुनते ही बड़ी बड़ी आंखों वाले क्यूट से बच्चे का दिल टूट गया । अब टूटे दिल का क्या है कि जुड़ तो जाता है पर अपने निशानों को छोड़कर । इस बार भी यही हुआ कि मेंढक की सी आंखों वाले लड़के ने आदर्शवादी खयालो को गालियां देते हुए कोसते हुए कहा छोटा सा वाक्य कहा 'भाड़ में जाये लोटा और भाड़ में जाये सब'
मामला सब शांत
ये बात तब की है जब रिम्मू कनिष्ट में पढ़ा करता था बड़ा छोटा सा था
अंगले साल जब वरिष्ट में सब स्मारक आये तो लगा रिम्मू अचानक से दो बिलांग बढ़ गया है
क्या करे उसके पास भी बढ़ने के अलावा कोई ऑप्शन ही न था ।
1st ईयर तक आते आते लड़के के विचार पूरी तरह बदल गए उसको असल जिंदगी जीने का जुनून सा आ गया जिंदगी जियो तो पूरे एटीट्यूड के साथ पूरी ठसक के साथ। गोमटेश्वर जी के साथ दोस्ती ।और मस्ती वाला माहौल जो वह अब भी बनाके रखता है उसे पहले से लुभाता तक
दरअसल एक बात की रिम्मू उसूलों का बड़ा पक्का है और दूसरी बात की वह दोस्तो के लिए कोई उसूल नही मानता। यही उसका सबसे बड़ा जीनियस है । हा वह थोड़ा बंद सा लगता है पर ये भी उसके उसूलों में से एक है कि अपनी कीमत खुद बनाओ दुसरो के हाथों खुद को बिकने मत दो ।लौंडा वक्त की नजाकत को अच्छे से समझता है इसलिए वह कहता है कि हमेसा सच बोलो और बोलते ही भाग जाओँ ।
आज तक जितने भी अविष्कारक हुए है वो अपने जीवन मे बड़े आलसी रहे है रिम्मू भी अपने छात्र जीवन मे आलसी रहे है आशा है (आशा भाभी नहीं कुत्तो आशा मतलब एक्सपेक्टेशन समझना) रिम्मू भी नई नई खोजे करेगा ।
लड़का बुद्धिजीवी है।  डिसेंट है स्मार्ट है पढ़ाई में भी अच्छा है
मुझे रूमपार्टनर के रूप में झेल चुका है मतलब सहनशील भी है
और मुझे गर्व है कि मैं उसकी कुछ निजी बातो का साझेदार भी हूँ

जैसे रिमांशु जयपुर की एक गिरलफ्रेंड बनाना चाहता है
रिम्मू चाहता है वह एक बड़ा सा विला बनाये जिसमे एक बड़ा रूम अपने यारो (मल्लब सारे मंगलमस् के लिए) के लिए हो
और भी कई सारी चीज़ें है जो यहाँ शेयर नही की जा सकती ।
रिम्मू दिखता नाज़ुक है पर है नही वो समझदार है और आखिरी बात की रिम्मू एक लड़का है
इति दर्दुर पुराणम्
पीयूष शास्त्री
गौरझामर
क्रमशः

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