रविवार, 15 अक्टूबर 2017

जिंनेंद्र

इस लेख को लिखने से पहले आपको बता दू ये लेख 5 बार शुरू हो चुका है लेकिन हर बार अधूरा रह जाने के कारण डिलिट हो जाता था हर बार नया विषय ओर हर बार नए विचारों से लबरेज़ (पुष्ट) यह लेख है इसलिए इसे उतनी ही तबज्जो दे जितनी आपने मेरे पुराने लेखों को दी है                                  ।।                  ।     दरअसल बात यह है कि।             :          जिंदगी मेला दिखाने ले गई थी एक दिन ।और फिर भीड़ में उंगली छुड़ा का गुम हो गई। हमारे भविष्य और हमारी समस्याओ म् जिंदगी खो सी गई है पर हम अभी जिंदा है किन्ही प्यारी सी स्मृतियों को यादों में सजाएं । होता यू है कि एक प्याली कॉफ़ी ,बालकनी और बारिश हो तो यादे भरभराकर आँगन में खेलने लगती है और हमारे चेहरों पर असली मुस्कान उभर उठती है(हाय यही तो है जिंदगी)        तो इस बार अल्फाज़ो की उंगलियां पकड़कर यादे एक बेहद खूबसूरत इंसान पर अटक गई है और उस हसीन बंदे का नाम है जिंनेंद्र कुमार बमनोरा।                                          :.          जिनेन्द्र :  यार तुम्हारे लिये क्या लिखूं शब्द ही नही मिल रहे ऐसा लगता है जैसे अल्फाज़ो ने रूठकर खुदखुशी कर ली हो । खेर कही से शुरू करना ही पड़ेगा तो जिनेन्द्र के नाम से याद आता है एक लंबा और चुस्त लड़का जो हर बात पे बड़ी नज़ाकत और एक खास अंदाज़ से "जय हो" बोलता है और किसी बच्चे की तरह खिलखिला उठता है। उनके बचपन के एक सवाल का जबाब उन्हें अब तक नई मिला कि" जब 7वी क्लास में हिंदी की परीक्षा में अनुप्रास अलंकार के उदाहरण के रूप मे जानम जाने जा जानम जाने जा जाने जिगर जानेमन लिख के आये थे तो मास्टर साहब ने  नीम की पतली सी संटी से पूरे स्कूल में दौड़ा दौड़ा के क्यो मारा था " खेर ये भी कोई मुद्दे की बात नही है असली हृदय को बिदारने वाली घटना तो जब हुई जब ये एक शादी में गये और दुल्हन की बिदाई के ""बक्त दुल्हन रो। रही थी और दूल्हा विमल पानमसाला का पैकेट फाड़कर रजनीगंधा जर्दा मिला रहा था "" इस भयानक प्रसंग ने इनको समझा दिया की मौन से क्रांतियां नई होती अगर इस निर्मोही दुनिया में जीना है तो कोहराम मचा दो। और इसी सोच को लेकर ये स्मारक में दाखिल हो गए फिर तो इनकी जिंदगी की  पायल की झुनझुन खनखन और रुनझुन सब बजने लगी और फिर इनकी यात्रा ने एक नया मोड़ लिया । इस लड़के का मानना यह है कि "जीवन एक प्रतिध्वनि है आप जिस लहजे में आवाज़ देंगे आपको पलट कर वही सुनाई देगी " एक सीधा सरल लड़का एक छोटे से गाँव से आया और एक मेट्रो शहर में पड़ने लगा पड़ते हुए उसे अहसास हुआ कि वह भी खास है और साबित भी कर दिया कि वह भी काबिल बन सकता है फ़िलहाल भाई को सेर शेर बड़े पसंद है तो उसी को समर्पित "हमे तुमकोे तलाशने अतीत में जाना होगा जिसकी राहे बड़ी दिलफरेब है वहाँ बड़े कमीने काले कुत्ते है  साहब देखना कही काट न ले । खतरों से खेलने का तो शौक बचपन से है ही  की स्मारक के वार्डन बन बैठे फिलहाल भाई की तनख्वाह के बारे में न पूंछे बस इतना जान लीजिए कि  की जिंनेंद्र की तनख्वाह इतनी है कि आपका क्रियाकर्म बढ़िया तरीके से हो सकता है       ।।            ।।       इस लेख को लिखने के बाद

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