रविवार, 15 अक्टूबर 2017

गोलू

2 लेखों के लिए पर्सनली हौसलाआफजाई के लिए भोत भोत धन्यवाद सच में मुझे नहीं मालूम था कि आपकी प्रतिक्रियाएं इतनी ज्यादा जिन्दा और सहज होंगी ।

इस बार मैं आपको एक ऐसे लड़के के बारे में बताने वाला हूँ जो मेरा भाई है मेरे ताऊ जी के पुत्र श्री गोलू जी महाराज उर्फ़ शुभम कुमार जैन उफ़ गलत हो गया शुभम जैन उर्फ़ गोलू
गोलू(शुभम)= 27 अप्रेल 1995 को गौरझामर के नयापुरा मोहल्ला में महका वालो के मंझले बेटे की बहू(मेरी ताई जी) के यहाँ लल्ला होने वाला था सब लोगो के चेहरे अजीब से कन्फूजन से भरे थे दरअसल 2 लड़कियों के बाद भारत में चाहे गांव हो या शहर माता पिता सास ससुर घरवाले सब एक ठो लल्ली नई लल्ला चाहते हैं इस बार जब ताई उम्मीद से हुई तो सब को उम्मीद हो गयी की इस बार तो वंश बढाने वाला आयेगा लल्ला आयेगा  । गाँव की सारी बाईया(मल्लब दादी और दाइ लोग भीडू) और विशेषज्ञ लोग महका वालो के यहाँ शौर वाले कमरे में अपने काम पे लगे थे .। प्रसव शुरू हो गया था कुछ ही देर में बच्चे की बाई (बुंदेलखंड में माँ और दादी को बाई कहते है यहाँ बाई मल्लब दादी) शौर वाले कमरे से कपडे में लिपटे एक नन्हे से जीव को अपने हाँथो में लेकर बाहर आई और उसे अपने  मंझले लड़के के हाथों में देते हुए कहा "मोड़ा भओ है अज्जू" (बधाई हो लड़का हुआ है) और शौर में भाग गई । ताऊ की आँखों से दो बुँदे गिर गई उन्होंने बच्चे के मांथे पर चुम्बन अंकित करते हुए कहा मेरा गोलू बच्चे के गाल और मुँह प्यारे रूप से गोलमटोल थे। करीब डेढ़ साल बाद उसका भाई भी इस दुनिया में आया पर वो कहानी अलग है ।
तो बस यही से शुरु हो जाती है गोलू की कहानी । गोलू को छह महीने बाद एक नया नाम मिला शुभम जो बुआ ने रखा पर वो नाम हमेशा स्कूल के रजिस्टर में लिखवाने के काम में ही आया स्कूल और मोहल्ले के बच्चो में भाई गोलू के नाम से ही मशहूर रहे
दरअसल दूसरी बात ये भी है कि गोलू मेरे से एक दरजे आगे था पर तीसरी 3rd में शनि और मेरे साथ की बजह से एक दर्ज़ा पीछे आके पढने लगा । हमारी किलास में 7 ठो शुभम थे लोधी रावत भारिल्ल मिश्रा शर्मा विश्वकर्मा चलो आज भी हमारे यहाँ पहला नाम बनिया हिन्दू ईसाई नै होता बरना बहुत ज्यादा बटवारा हो जाता
हाँ तो 7 शुभम के होने के चक्कर में टीचर तो पप्पा का नाम साथ में लगाके काम चला लेते थे लेकिन लड़के तो नए नए नाम इज़ाद करके पुकारने लगे पर गोलू का नामकरण करने की जहमत लड़को ने नई उठाई क्युकी उसका नाम तो पहले ही बिगड़ा हुआ था गोलू मोलू कैसा गोल सा नाम है लड़के एक पेपर लेते और एक गोल बनाते और उसके नीचे उ की मात्रा लगाते और गोलू के पास फेंक देते  ।पर कुछ दिन तक कोई रिस्पॉन्स न मिलने पर लड़को ने ऐसा करना बंद कर दिया  ।
गोलू की दसवीं तक पढ़ाई गौरझामर में हुई 10 वि में भैया जी ने ब्लॉक टॉप तो नई  पर ब्लॉक के 1टॉप 10 में जगा(जगह)बना ली
इसके बाद गौरझामर का यह गबरू जवान लड़का जयपुर पंहुचा और अपनी ऊँची hight के कारन मंगलम में ऊंटो वाली जगह अपने नाम कर ली हालांकि ऑफिसियल रेगिस्तान के  जहाज (चर्चित)के आने के बाद ये जगह दूसरे न.पर आ गई  ।
बेसे एक पर्सनल बात बता दू 10 वीं तक भैया पर लड़कियों का मर मिटना चालू हो गया था भगवन की दया से लुक्स और फिटनेस का जाने कोनसा राज था जो लडकिया इनके लिए पटरियां तक उखाड़ने को तैयार रहती थी हालाँकि  वो सिलसिला आज भी जारी है । पर दसवीं की परीक्षा में लग जाने के कारण भैया ने अपना कॉन्सन्ट्रेट पढाई पर बनाये रखा ।
जयपुर आने के बाद भैया के कांट्रेक्ट स्टेट से बदलकर राष्ट्रीय हो गए पाटिल नमन भिंड गोरमी अरिहन्त जैसे नए पर लाजवाव दोस्तों के साथ दोस्ती का आगाज किया और उसे 5 वि साल तक निभाते रहे
कहा जाता है कि स्मारक से जो भी बंदा किसी एक जगह 3 बार हो आये तो बही अपने समवसरण की व्यवस्था हो जाती है पर गोलू इस मामले में अपवाद था भाई 3 साल में 3 जगह गया और 3 समवसरण की व्यवस्था की जुगाड़ बना आया । उसके बावजूद गोलू ने ईमानदारी बरतते हुए 1 जगह चुन ली डबरा mp (भाई ने चुनाव में स्टेट को बनाये रखा ) नाम में  नहीं बताऊंगा (मुझे पता है इस बात पे गोलू के चेहरे पर मुस्कान आ गई होगी)
भाई की कुछ  विशेषताओं पर पिरकाश दाल दू4
गोलू स्मार्ट लड़का है
गोलू बड़ा दोस्ताना और सभ्य लड़का है
गोलू को बुंदेलखंडी बड़ी पसंद है काय लडुआ से फोर रये हो ।को आओ । जैसे वाक्य गोलू के मुख से गिरते रहते  है (100डंडी 1 बुंदेलखंडी)
और लास्ट गोलू लड़का है इस किरन्तिकारी पोस्ट के बाद मेरे गोलू द्वारा पिटने का प्रतिशत 100.100%
#पीयूष शास्त्री

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